अवधी किहानी, सुघरी -2
अवधी कहानी
====सुघरी====
लेखक:- प्रदीप सारंग
सुघरी जब से शहर के स्कूल मा पढ़ै का जाय लागि है वहि के तेवर मा अउर ज्यादा धार आई है। वहि के जवाब या तौ सवाल की तरह हुवत हैं या फिर अतने नुकील और चुटील कि सुनय वाले के आँखिन के समने अँधेरु छाय जात हवै। यानी जवाब सुनि कै लोग आगे केर सवालै भूलि जात हैं। अब तौ गाँव केर लोग सुघरी से बेमतलब वाले हालौ चाल पूछै मा अचकचाय लागि हैं।
आजु सुघरी केर मन सबेरेन से कुछ खराब है। कारन है कि लोग अपने अकेलि उन्नति व स्वारथ के आगे, गाँव कै उन्नति व सफाई का वजन नाही दै रहे हैं।
आजुइ सबेरे कै बात आही स्कूल जात समय समने से गन्ना लदी ट्राली आवत देखि सुघरी सायकिल से उतरि कै किनारे दत्ताइन आजी के दुआरे खड़ी होइगै। काहेकि एक तौ रास्ता साँकरि दूसरे तीन गुना गन्ना लादे, सबधर रस्ता घेरि कै चलत हैं ट्रैक्टर ट्राली। किनारे नरदहा केर पानी भरा है उ अलग। सुघरी का खड़ी देखि आजी बोल्कारै बरे पूछिन- बिटिया! पढ़ै जाय रही हौ ? सुघरी बोली- नाहीं दादी... खरीदी करै जाइत है। हमरे स्कूल मा पढ़ाई फ्री नाहीं मिलत हवै। पता नहीं आजी कुछ समझिन कि नाहीं मुल आगे अउर कुछ पूछिन नाहीं।
ओवरलोडिंग के गन्ना लदे ट्रैक्टर ट्रॉली धीरे चलतै हैं। खड़े खड़े 5 मिनट बीति गे हैं। जेहिसे स्कूल का देर हुवय लागि है। मुल आगे रस्ता साँकरि हुवय के कारन सब लड़िका लड़की आय कै दत्ताइन आजी के द्वारेन रुके हैं।
सबका देर हुवय केर चिन्ता होय रही है। स्कूलन के बीच आपस मा खेलकूद हुवय का हैं जोरन कै तैयारी चलि रही है। सुबह के समय अउर इंटरवल मा सबै अपने खेल कै अभ्यास करत हैं। बैडमिंटन औरु कबड्डी सुघरी केर प्रिय खेल आहैं। यहि से बैग के साथ बैडमिंटन-किट भी पीठ पर टाँगि कै आवय जाय का परत है। बैडमिन्टन किट कन्धे पर टाँगे के बादि सुघरी के मन मा कुछ स्पेशल एनर्जेटिक फील आय जात है। चेहरे पर मौजूद चमक अपने आपै बढ़ि जात है।
पिछली बार हाईस्कूल बोर्ड हुवय से सुघरी खेल पर ज्यादा ध्यान नहीं दिहिस रहै जेहिसे स्कूल टीम मा शामिल नहीं भै रहै, मुल अबकी ख्यालै का मनु बनाय कै हररोज इंटरवल मा तैयारी चलि रही है। 15 दिन बचे हैं यहि बरे स्कूल टाइम के बाद शाम का एक घण्टा खेल अभ्यास करावै का निर्णय प्रिंसिपल सर लिहिन हैं। आजु जब क्लास हाजिरी के बादि टीचर जी सबसे पूछिन कि खेल अभ्यास करै बरे स्कूल समय के बादि एक घण्टा जो-जो रुकि सकैं वहि आपन नाम लिखाय दियैं। कोई का जवाब नहीं मिला। क्लास टीचर दुबारा पूछिन तबौ कोउ जवाब न दिहिस। अबकी सुघरी का नाम लइकै पूछिन तौ सुघरी बोली कि अपने अहं मा डूबा उतरान पुरुष समाज लड़कियन का कौनव निर्णय लियै बरे छुट्टा नहीं छोड़े है। तौ बिना घर की इजाजत कोउ हामी कइसे भरि लियै। आजु आप पूछे हौ घरन मा पूछि कै काल्हि जवाब आई। रही हमार बात तौ अगर हमरे गाँव से और लड़कियन का घरन से इजाजत मिलि जाई तौ हमहूँ का मिलि जाई, अकेले हमहूँ का नाहिंन जाना जाय। क्लास टीचर हुँकारी भरिन औ खोपड़ी हिलाय कै चले गये।
रोजुइ की तरह शाम का दुआरे लागै वाले जमघट मा जब मुनिया, चंदा, औरु निकुही के बाप आय गे तब जाय के सुघरी स्कूलै केर सालाना खेल मा शामिल हुवय वाली आपनि बात सबके समने कहिस।
निकुही के बाबा बोले कि स्कूल पढ़ाई केर घर आँय कि खेल के। बिना कुछ सोचे समझे सुघरी तुरतै जवाब दिहिस कि पढ़ाई तौ घरै मा पढ़े का हुवत है, स्कूल मा सिर्फ कइसन पढ़ा जाय यहु सिखै जावा जात है। स्कूलन मा कतनी पढ़ाई हुवत है सबै तौ जानत हैं। साँचु यहु आय कि स्कूल जाइत है कढ़ै, पढ़ाई तौ हमका घरहिम करै का हुवत है। खेल से तन मन फुर्तीला बना रहत है। जिनका कुल खेलहिन का है उनकै बातै अलग।
सब के सब चुप। बप्पा बोले तुम जनतै होइहौ कि अकेले नहीं जाय का है, दुइ तीन का तैयार करौ और जाव। हमारि कौनिव रोक नाही है। हमका अपनी बिटिया पै पूरा भरोसा है। यहि पर सबै बोलि परे कि भरोसे मा कौनियू कमी नाही है मुल.... बीचै मा बात काटि कै सुघरी बोलि परी की जतने मुल हैं सबका जवाब है कि भरोसा कमजोर ना करौ, हम बिटिया लोग सिर झुकै ना दियबै। चिन्ता बेटवन की तरफ कुछ ज्यादा करत जाव। पूरे देश प्रदेश मा बिटियन से ज्यादा नम्बर बेटवा लाय नहीं पाय रहे हैं। तबौ सारे सवाल हमहिन सबसे..?? यहि तरके चिंता बेटवन कै करै का चाही।
एकु बाबा कहिन- बिटिया कुछ ज्यादा बोलि गयेव। सुघरी का यहु जवाब उनहूँ केर बुद्धि शून्य करि दिहिस- बाहर आवै जाय के मसला पर हम बिटियन केर जौन ज्यादा चिन्ता करै का परत है वहिके असली कारण बेटवै हैं, जिन केर बत्तमीजी से हर माय बाप के मन मा डर बइठ है।
सुघरी बताइस कि गाँव की चारि लोग रहबै मुल किरन दुखी है, अफसोस हमहू का है कि खेल मा किरन हमरे साथ ना रहि पाई। रामू काका कहत रहे कि इधर हमरे पास खेल कै फीश बरे पैसा नहीं है। काहेकि ज्यादा बरसात से अउर पानी निकरै का रास्ता न हुवय से हमारि चारिउ खेतन केर फसल जलभराव से खराब होइगै रहै। यहि बात पर सुघरी के बाबा बोल पड़े कि अगर तुम चहत हौ कि किरन के साथ रहे से अच्छा खेलिहौ तौ वहिकी फीश तोर बाप जमा करि देई, रमुआ के पास जब होइहैं तब वापिस करी। ना भी करि पाई तौ हम मानि लियब कि हम अपनी पोती के लिए एक सहयोगी बरे फीश जमा किया है।
अतना सुनतै सुघरी कै आँखी डबडबाय आईं.... औ दौरि कै बाबा के गले लागि गै, सुघरी कै खुशी देखि के बाबौ की आँखिन से खुशी छलकि आई। सब जन हर्षाय गए, औरु मनै मन अतना उल्लास भवा मनौ आजै सुघरी जीति आई है।
सुघरी अपने ज्ञान आचरण औ समझदारी से पास-पडोस के गाँवन की बिटेवन के बीच आईकॉन जइस बनिगै है। सबै के माय बाप सुघरी केर उदहारन दियत रहत हैं, अउर बिटेवै खुदै सुघरी जइस बन जावा चहत हैं। सबकी नजरै अगले हफ्ता हुवय वाले खेल तरफ लागी हैं। खेल प्रतियोगिता तौ दुइन स्कूलन के बीच है मुल सुघरी के कारन स्कूल मा पहिलीबार बिटेवन केर खेल टीम बनि पाई है। यहि बरे प्रतियोगिता केर बहुतै परचार है। कइयु साल बादि अबकी जौन उत्साह देखाय परि रहा है यहिसे स्कूलौ का लागै लाग है कि टीम जीति कै जरूर आई।
खेल वाले दिन, बिटेवन केर कबड्डी खेल देखै बरे, आस-पास के गाँवन से जन सैलाब उमड़ि आवा। अपने घर परिवार, पड़ोस के लोगन का देखि कै कप्तान सुघरी सहित खिलाड़ी बिटेवन केर हौसला बदरे तलक बुलन्द होइगे। सुघरी केर टीम अइस खेलिस कि विरोधी टीम पाँचै मिनट मा ढेर होइगै। दूसरि पारी भी अइसै रही। सुघरी बहुत आसानी से कबड्डी जीति कै स्कूल का जलवा बुलन्द करि दिहिस। पढ़ाई मा जिला टॉप करै वाली सुघरी, खेलौ मा हीरोइन बनिगै। सबै सुघरी का काँधे पर उठाये अइसन मैदान भर मा घुमाइन जइसै जगु जीति लिहिस हुवय।