साहित्य व विचार (Literature & Thoughts)
अवधी रचनाएं, पर्यावरण विचार एवं सामाजिक दृष्टिकोण
प्रदीप सारंग एवं अन्य प्रबुद्ध विचारकों द्वारा लिखित उत्कृष्ट आलेख, संस्मरण और विचार:
झरिहख
आजु जब हम सोय कै जागेन, तौ झमाझम बारिस होत रही। झमाझम मतलब वाकई झम-झम, झम-झम कै आवाज कानन मा सुनाय परत रही।
नेग की जबरन वसूली नहीं कर सकेंगे किन्नर-हाईकोर्ट
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने कहा कि पारंपरिक "जजमानी" के नाम पर जबरन पैसे लेना कानूनी रूप से मान्य नहीं है। जबरन वसूली अपराध है। कोर्...
मैं फेल हुआ या पास....?
सामाजिक होने, पत्रकार होने का ऐसा एक द्वंद मेरे अंदर भी पनप चुका था कि आखिरकार इस प्रकरण में मेरी भूमिका क्या हो सकती है..?? यानी मुझे क्या करना चाहिए? कुछ करना चाहिए अथवा नजरअंदा...
विचलन बनाम छतिपूर्ति
विभाग में कई बड़े अधिकारी इस रिश्वत काण्ड में संलिप्त थे। यह मुझे थोड़ा विलम्ब से पता चला था। तब से अर्थात् नवम्बर 2017 यानी सेवा निवृत्ति से इस विभाग को उच्च भिक्षा विभाग ही लिखता...
छात्रों में उच्च मानवीय मूल्य और रेडक्रास
रेडक्रॉस सिर्फ एक शब्द नहीं है। यह एक वैचारिकी का नाम है। यह उस उच्चतम मानवीय मूल्य का संकेतक है जो कि पीड़ित-मानवता की सेवा का अत्यंत व्यापक संकल्प समेटे एक विशेष सोच-विचार-आचरण को...
एक जरुरी गहन चिन्तन, भारत और भारतीयता
विदेशी' कहकर वैलेंटाइन डे का विरोध करना खोखला तर्क है, क्योंकि हम विज्ञान, तकनीक और संविधान तक में वैश्विक विचारों को अपना चुके हैं। असली भारतीयता दिखावटी राष्ट्रवाद या संकीर्णता म...
नृत्य द्वारा उठाया जाता है - देवी-देवताओं के वाहन से जुड़े रहस्य से पर्दा
भारतीय पौराणिक कथाओं में पशु-पक्षियों के वाहनों को देवी-देवताओं के विशेष गुणों और ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं के प्रतीक रूप में दर्शाया गया है। हमारी पारंपरिक नृत्य और कला शैलियां इन दैवीय...
कैसे बनें पत्रकार, जानें कुछ जरूरी बातें
भारत में शिक्षा, रोजगार, कृषि, स्वास्थ्य, राजनीति और सामाजिक मुद्दे पत्रकारिता के प्रमुख विषय हैं। पत्रकार समाज तक सटीक और निष्पक्ष जानकारी पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है...
भूख, भोजन, भीख और भ्रष्टाचार
व्याकरण की दृष्टि से 'भूख' सिर्फ स्थिति-सूचक संज्ञा है, जबकि जीवन के लिए 'भूख' अपरिहार्य स्थिति है। भूख और भोजन एक सिक्के के दो पहलू हैं। जीवन के लिए दोनों की महत्ता बराबर है।
स्त्री बनाम पुरूष
स्त्री अउर पुरुष मा न कोऊ कमतर है, न कोऊ श्रेष्ठतर, न कोऊ वृहत्तर अथवा गुरुतर। दुनहूँ केर अपन अलग-अलग अस्तित्व है, अलग-अलग उपयोगिता है, अलग-...
सुघरी
मेला जाय की खुशी मा, गोबर की खेप लइकै जाय रही 'सुघरी' के कदमन की चाल आजु अपने आपै कुछ बढ़ी हुई है।