स्त्री बनाम पुरूष
स्त्री अउर पुरुष मा न कोऊ कमतर है, न कोऊ श्रेष्ठतर, न कोऊ वृहत्तर अथवा गुरुतर। दुनहूँ केर अपन अलग-अलग अस्तित्व है, अलग-अ...
चार दशकों के ज़मीनी अनुभवों, अवधी लोक-जीवन की सच्चाइयों, पर्यावरण के गंभीर सवालों और मानवीय संवेदनाओं को शब्दों में पिरोता आलेख व चिंतन संकलन। यहाँ शब्द मात्र विचार नहीं, बल्कि जन-सरोकारों का जीवंत दस्तावेज हैं।
स्त्री अउर पुरुष मा न कोऊ कमतर है, न कोऊ श्रेष्ठतर, न कोऊ वृहत्तर अथवा गुरुतर। दुनहूँ केर अपन अलग-अलग अस्तित्व है, अलग-अ...
भारतीय पौराणिक कथाओं में पशु-पक्षियों के वाहनों को देवी-देवताओं के विशेष गुणों और ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं के प्रतीक रूप में दर्शाया गया है। हमारी पारंपरिक नृत्य और कला शैलियां इन दैवीय गुणों, मुद्राओं और प्रकृति के प्रति सम्मान को अभिव्यक्ति देकर समाज को आध्यात्मिक चेतना से जोड़ती हैं।
विदेशी' कहकर वैलेंटाइन डे का विरोध करना खोखला तर्क है, क्योंकि हम विज्ञान, तकनीक और संविधान तक में वैश्विक विचारों को अपना चुके हैं। असली भारतीयता दिखावटी राष्ट्रवाद या संकीर्णता में नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अपने आचरण व सोच को सुधारने में निहित है।
व्याकरण की दृष्टि से 'भूख' सिर्फ स्थिति-सूचक संज्ञा है, जबकि जीवन के लिए 'भूख' अपरिहार्य स्थिति है। भूख और भोजन एक सिक्के के दो पहलू हैं। जीवन के लिए दोनों की महत्ता बराबर है।
भारत में शिक्षा, रोजगार, कृषि, स्वास्थ्य, राजनीति और सामाजिक मुद्दे पत्रकारिता के प्रमुख विषय हैं। पत्रकार समाज तक सटीक और निष्पक्ष जानकारी पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
रेडक्रॉस सिर्फ एक शब्द नहीं है। यह एक वैचारिकी का नाम है। यह उस उच्चतम मानवीय मूल्य का संकेतक है जो कि पीड़ित-मानवता की सेवा का अत्यंत व्यापक संकल्प समेटे एक विशेष सोच-विचार-आचरण को स्वेच्छा से धारण करने की प्रेरणा प्रदान करता है।
<p>न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने कहा कि पारंपरिक "जजमानी" के नाम पर जबरन पैसे लेना कानूनी रूप से मान्य नहीं है।</p><p> जबरन वसूली अपराध है। कोर्ट ने कहा कि यदि नेग मांगने में दबाव, धमकी या जबरन वसूली शामिल है, तो यह भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराध की श्रेणी में आएगा और इसके लिए एफआईआर दर्ज की जा सकती है।</p>
मेला जाय की खुशी मा, गोबर की खेप लइकै जाय रही 'सुघरी' के कदमन की चाल आजु अपने आपै कुछ बढ़ी हुई है।
आजु जब हम सोय कै जागेन, तौ झमाझम बारिस होत रही। झमाझम मतलब वाकई झम-झम, झम-झम कै आवाज कानन मा सुनाय परत रही।