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अवधी गद्य

सुघरी

19 May 2026 · प्रदीप सारंग

मेला जाय की खुशी मा, गोबर की खेप लइकै जाय रही 'सुघरी' के कदमन की चाल आजु अपने आपै कुछ बढ़ी हुई है।

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साक्षात्कार

झरिहख

19 May 2026 · प्रदीप सारंग

आजु जब हम सोय कै जागेन, तौ झमाझम बारिस होत रही। झमाझम मतलब वाकई झम-झम, झम-झम कै आवाज कानन मा सुनाय परत रही।

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