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प्रदीप सारंग संस्मरण ग्रंथावली
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प्रदीप सारंग संस्मरण संकलन • अध्याय ११ / १४
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आलेख

कैसे बनें पत्रकार, जानें कुछ जरूरी बातें

भारत में शिक्षा, रोजगार, कृषि, स्वास्थ्य, राजनीति और सामाजिक मुद्दे पत्रकारिता के प्रमुख विषय हैं। पत्रकार समाज तक सटीक और निष्पक्ष जानकारी पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

account_circle लेखक: प्रदीप सारंग
event 24 Sep 2026
pin_drop कमरावां, बाराबंकी (उ.प्र.)
schedule 12 min read
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कैसे बनें पत्रकार, जानें कुछ जरूरी बातें
photo_camera आलेख प्रमुख दृश्य • प्रदीप सारंग संग्रह उच्च-रिज़ॉल्यूशन मूल छायाचित्र

भारत देश दुनियाँ का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। युवाओं की सबसे अधिक संख्या है। सकल जनसंख्या की दृष्टि से विश्व का सबसे बड़ा देश बन गया है। बढ़ती जनसंख्या और कम पड़ते संसाधन एक बड़ी चुनौती विद्यमान है। हमारे देश की संस्कृति विविधतापूर्ण है, इतिहास समृद्ध है और अर्थव्यवस्था तेज़ी से आगे बढ़ रही है। शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, सुरक्षा, रोजगार, भोजन, इंटरनेट, तथा इन क्षेत्रों में बढ़ता अपराध, साइबर अपराध, सांस्कृतिक धार्मिक संक्रमण, यहाँ की राजनीति, घाटे की खेती, संसाधनों का आसमान वितरण, लिंग भेद, भाषा व क्षेत्रवाद के विमर्श, इत्यादि का एक वृहद् परिदृश्य भारत में मौजूद है। यही मुद्दे पत्रकारिता क्षेत्र में अपना कैरियर शुरू करने के लिए आदर्श विषय बनते हैं।


       यहाँ यह जानना भी जरूरी है कि आप तौर पर जिन पत्रकारों को हम लोग समाचार संकलन करते देखते रहते हैं इनमें से अधिकांश अंशकालिक पत्रकार होते हैं। अंशकालिक का मतलब वेतनभोगी नहीं। हम यहाँ पूर्णकालिक पत्रकार यानी वेतनभोगी पत्रकारों की बात कर रहे हैं। अंशकालिक पत्रकारिता को जॉब के तौर पर नहीं बल्कि सौखिया तौर पर किया जाने वाला जॉब माना जाता है। अंशकालिक और पूर्णकालिक पत्रकार में जनता के लिए कोई फर्क नहीं होता है क्योंकि दोनों के अधिकार एक समान ही होते हैं। फर्क होता है पत्रकारिता संस्थान एवं प्रशासन द्वारा प्रदान की जाने वाली सुविधाओं में।

          एक पत्रकार वर्तमान घटनाओं और मुद्दों पर सटीक और निष्पक्ष जानकारी प्रदान करके समाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पत्रकारिता हमेशा जनता की राय बनाती व बदलती रहती है। भारत के लोकतंत्र को बनाये रखने में व्यवस्थापिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका के साथ पत्रकारिता को विशेष महत्व प्रदान किया गया है। जबकि पत्रकारिता अपनी दृष्टि से शासन प्रशासन राजनीति सहित सम्पूर्ण समाज के समस्त अवयवों की समग्र-समीक्षा करती रहती है। इसीलिए पत्रकारिता क्षेत्र में आने के लिए भाषा का सम्पूर्ण ज्ञान तो जरूरी है ही किन्तु समाज के सभी अवयवों की भी सामान्य जानकारी जरूरी होती है। यदि आप भारत में पत्रकार बनने की इच्छा रखते हैं तो आपको आगे दी गयी जानकारियां होनी चाहिए। 

भारत में पत्रकार बनने के लिए पत्रकारिता या जनसंचार में डिग्री सबसे पसंदीदा योग्यता है। हालाँकि, अन्य विषयों में डिग्री वाले उम्मीदवार भी पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स जैसे कोर्स कर सकते हैं।

भारत में पत्रकारिता और जनसंचार पाठ्यक्रम प्रदान करने वाले कुछ लोकप्रिय संस्थानों में भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली विश्वविद्यालय और सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया एंड कम्युनिकेशन शामिल हैं।

आवश्यक कौशल

भारत में पत्रकार बनने के लिए कई कौशल और योग्यताएँ आवश्यक हैं। यहाँ कुछ प्रमुख कौशल और चरण दिए गए हैं जिन पर विचार किया जाना चाहिए:

शिक्षा: पत्रकार बनने के लिए आम तौर पर पत्रकारिता या जनसंचार में डिग्री की आवश्यकता होती है। भारत में कई विश्वविद्यालय और कॉलेज ऐसे पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं, जिनमें भारतीय जनसंचार संस्थान और एशियाई पत्रकारिता कॉलेज शामिल हैं।

लेखन और संचार कौशल: एक पत्रकार के लिए मजबूत लेखन कौशल आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, पत्रकारों को प्रिंट, ऑनलाइन और प्रसारण सहित विभिन्न माध्यमों में प्रभावी ढंग से संवाद करने में सक्षम होना चाहिए।

शोध कौशल: पत्रकारों को गहन शोध करने और अपने काम की तथ्य-जांच करने में सक्षम होना चाहिए। इसके लिए विवरण पर ध्यान देने और सटीकता के प्रति प्रतिबद्धता की आवश्यकता होती है।

आलोचनात्मक सोच कौशल: पत्रकारों को सूचना का विश्लेषण करने और महत्वपूर्ण विवरणों की पहचान करने में सक्षम होना चाहिए। उन्हें पूर्वाग्रह की पहचान करने और तथ्य को राय से अलग करने में भी सक्षम होना चाहिए।

अनुकूलनशीलता: पत्रकारिता एक तेज़ गति वाला क्षेत्र है जिसमें अनुकूलनशीलता और दबाव में काम करने की क्षमता की आवश्यकता होती है। पत्रकारों को समय सीमा को पूरा करने और एक साथ कई परियोजनाओं पर काम करने में सक्षम होना चाहिए।

नेटवर्किंग कौशल: पत्रकारिता के क्षेत्र में संपर्कों का नेटवर्क बनाना महत्वपूर्ण है। पत्रकारों को स्रोतों और सहकर्मियों के साथ संबंध स्थापित करने में सक्षम होना चाहिए।

नैतिकता: पत्रकारों को सटीकता, निष्पक्षता और वस्तुनिष्ठता सहित नैतिक मानकों का पालन करना चाहिए। ईमानदारी बनाए रखना और हितों के टकराव से बचना महत्वपूर्ण है।

प्रौद्योगिकी कौशल: आज के डिजिटल युग में, पत्रकारों को क्षेत्र में उपयोग की जाने वाली विभिन्न तकनीकों और सॉफ़्टवेयर से परिचित होना चाहिए। इसमें सोशल मीडिया, डिजिटल एडिटिंग सॉफ़्टवेयर और ऑनलाइन प्रकाशन प्लेटफ़ॉर्म शामिल हैं।

इंटर्नशिप और कार्य अनुभव: पत्रकारिता में व्यावहारिक अनुभव बहुत ज़रूरी है। इंटर्नशिप और कार्य अनुभव से आपको व्यावहारिक प्रशिक्षण और क्षेत्र में अनुभव मिल सकता है। ऊपर बताए गए कौशल और योग्यताएँ हासिल करके आप भारत में एक सफल पत्रकार बनने के लिए मज़बूत आधार तैयार कर सकते हैं। पत्रकारों के लिए कई पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। यहाँ कुछ लोकप्रिय पाठ्यक्रम दिए गए हैं-

  • बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (बीजेएमसी) - बीजेएमसी कोर्स एक तीन वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम है जो पत्रकारिता और जनसंचार के विभिन्न पहलुओं जैसे रिपोर्टिंग, संपादन, समाचार लेखन और प्रसारण पत्रकारिता को कवर करता है।
  • पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा (पीजीडीजे) - यह एक वर्षीय स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम है जो पत्रकारिता और संबंधित क्षेत्रों जैसे मीडिया नैतिकता, मीडिया कानून और मीडिया प्रबंधन में विशेष प्रशिक्षण प्रदान करता है।
  • पत्रकारिता में डिप्लोमा - यह एक वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम है जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों जैसे समाचार एकत्रीकरण, समाचार लेखन और रिपोर्टिंग पर केंद्रित है।
  • पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातकोत्तर (एमजेएमसी) - यह दो वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम है जो पत्रकारिता और जनसंचार में उन्नत प्रशिक्षण प्रदान करता है।
  • पत्रकारिता में कला स्नातक (बीए) - यह तीन वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम है, जो मीडिया नैतिकता, समाचार एकत्रीकरण और लेखन जैसे विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला को कवर करता है।
  • टेलीविजन पत्रकारिता में डिप्लोमा - यह एक वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम है जो विशेष रूप से टेलीविजन पत्रकारिता पर केंद्रित है, जिसमें कैमरा वर्क, स्क्रिप्टिंग और संपादन शामिल है।
  • इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए डिप्लोमा- कई निजी  संस्थान वर्तमान जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रम में बदलाव कर रहे हैं। जिनकी जानकारी गूगल और नेट पर उपलब्ध है।
  • फीचर लेखन के विशेष कोर्स/डिप्लोमा- फीचर लेखन भी पत्रकारिता जगत का एक महत्वपूर्ण अंग है। जो कि समाचार पत्रों में सम्पादकीय पेज पर अथवा साप्ताहिक स्तम्भों में आलेख के रूप में दिखाई पड़ते हैं। एक पत्रकार के लिए फीचर-लेखन एक अतरिक्त योग्यता होती है। किन्तु कुछ लोग पत्रकारिता न करके सिर्फ फीचर-लेखन के द्वारा अर्निंग करते हैं।

पत्रकार का वेतन

भारत में पत्रकारों का वेतन अनुभव के स्तर, जिस संगठन के लिए वे काम करते हैं और स्थान जैसे कारकों के आधार पर बहुत भिन्न हो सकता है। जैसे-जैसे उन्हें अधिक अनुभव प्राप्त होता है, उनके वेतन में काफी वृद्धि हो सकती है। 

पत्रकार की जॉब प्रोफ़ाइल यानी जिम्मेदारियाँ

           एक पत्रकार पूरी तरह से पेशेवर होता है जो समाचार और जानकारी एकत्र करता है, उसका विश्लेषण करता है और जनता के सामने प्रस्तुत करता है। एक पत्रकार की नौकरी प्रोफ़ाइल उस मीडिया के प्रकार के आधार पर भिन्न हो सकती है जिसके लिए वे काम करते हैं, जैसे कि समाचार पत्र, टेलीविजन, रेडियो या ऑनलाइन समाचार आउटलेट। एक पत्रकार की कुछ सामान्य नौकरी की ज़िम्मेदारियाँ इस प्रकार हैं:

सूचना एकत्र करना: पत्रकार साक्षात्कार आयोजित करके, कार्यक्रमों में भाग लेकर, शोध करके तथा विभिन्न स्रोतों जैसे सरकारी दस्तावेजों, सार्वजनिक अभिलेखों और ऑनलाइन संसाधनों का उपयोग करके सूचना एकत्र करते हैं।

तथ्य-जांच: एक पत्रकार यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है कि उनके द्वारा एकत्रित की गई जानकारी सटीक और विश्वसनीय है।

लेखन और रिपोर्टिंग: पत्रकार अपने-अपने मीडिया आउटलेट के लिए लेख, रिपोर्ट और समाचार लिखते हैं। उन्हें अपने प्रकाशन की शैली और प्रारूप का पालन करते हुए जानकारी को स्पष्ट और संक्षिप्त तरीके से प्रस्तुत करना चाहिए।

साक्षात्कार आयोजित करना: पत्रकार अक्सर अपनी कहानियों के लिए जानकारी जुटाने के लिए स्रोतों के साथ साक्षात्कार आयोजित करते हैं। उन्हें विचारशील और प्रासंगिक प्रश्न पूछने चाहिए, और जवाबों को ध्यान से सुनना चाहिए।


संपादन और प्रूफरीडिंग: पत्रकारों को अपने काम को संपादित और प्रूफरीड करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह त्रुटि रहित है और उनके प्रकाशन के मानकों को पूरा करता है।

नवीनतम जानकारी रखना: पत्रकारों को अपने क्षेत्र में वर्तमान घटनाओं और रुझानों से अपडेट रहना चाहिए। उन्हें जिन मुद्दों को कवर करते हैं, उनकी व्यापक समझ होनी चाहिए और संदर्भ और विश्लेषण प्रदान करने में सक्षम होना चाहिए।

समय-सीमा का पालन करना: पत्रकारों को कड़ी समय-सीमा के अंतर्गत काम करना होता है और उन्हें शीघ्रता से गुणवत्तापूर्ण कार्य करने में सक्षम होना चाहिए।

भारत में पत्रकार बनने के लिए आवश्यक शैक्षिक योग्यता-

भारत में पत्रकार बनने के लिए किसी विशेष शैक्षिक योग्यता की आवश्यकता नहीं है फिर भी कम्प्यूटर ज्ञान अनिवार्य है। प्रिंट मीडिया डिग्री नहीं योग्यता को प्राथमिकता देते हैं वहीं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्षेत्र में योग्यता के साथ डिग्री डिप्लोमा को वरीयता अधिक दी जाती है।  पत्रकारिता, जनसंचार या संबंधित क्षेत्र में स्नातक की डिग्री पत्रकारिता की नौकरी पाने में सहायक होती है। योग्यता और अनुभव के बिना तो कुछ भी सम्भव ही नहीं है फिर भी डिग्री या डिप्लोमा किसी की विषयगत जानकारी का प्रमाण तो है ही। कुशलता का अर्थ ही है कि सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों क्षेत्र में पर्याप्त वांछित जानकारी का होना। कैरियर के रूप में इच्छुक के लिए डिग्री डिप्लोमा बहुत जरूरी हैं।


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— प्रदीप सारंग

कमरवाँ, सतरिख (बाराबंकी) • संस्मरण संकलन
प्रदीप सारंग संस्मरण डिजिटल ग्रंथावली (संस्करण 2026)
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ग्रंथ अनुक्रमणिका

कुल १४ आलेख व अध्याय
१
आलेख

कुछ अच्छे लोग

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२
अवधी गद्य

अवधी किहानी, सुघरी -2

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३
अवधी गद्य

झरिहख

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४
हिंदी पद्य

दोहे- "नारी"

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५
आलेख

नेग की जबरन वसूली नहीं कर सकेंगे किन्नर-हाईकोर्ट

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६
आलेख

मैं फेल हुआ या पास....?

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७
आलेख

विचलन बनाम छतिपूर्ति

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८
आलेख

छात्रों में उच्च मानवीय मूल्य और रेडक्रास

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९
आलेख

एक जरुरी गहन चिन्तन, भारत और भारतीयता

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१०
आलेख

नृत्य द्वारा उठाया जाता है - देवी-देवताओं के वाहन से जुड़े रहस्य से पर्दा

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११
आलेख

कैसे बनें पत्रकार, जानें कुछ जरूरी बातें

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१२
आलेख

भूख, भोजन, भीख और भ्रष्टाचार

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१३
आलेख

स्त्री बनाम पुरूष

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१४
अवधी गद्य

सुघरी

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प्रदीप सारंग संस्मरण डिजिटल ग्रंथावली (संस्करण 2026)
translate अवधी लोक-शब्दावली मंजूषा (Awadhi Lexicon)

इस संस्मरण में प्रयुक्त ठेठ अवधी शब्दों के अर्थ

बाराबंकी जनपद की बोलचाल से संकलित
झरिहख संज्ञा • Awadhi

अनवरत कई दिनों तक चलने वाली लगातार धीमी फुहार व मूसलाधार बारिश।

घरैतिन संज्ञा • Awadhi

गृहस्वामिनी, घर की मालकिन अथवा धर्मपत्नी के लिए आदरसूचक शब्द।

कनकी संज्ञा • Awadhi

चावल का खंडित टुकड़ा (खंढा), जो पक्षियों को चुगाने के काम आता है।

हरहा गोरु संज्ञा • Awadhi

हल जोतने वाले बैल एवं मवेशी जानवर, जो खूंटे पर बंधे रहते हैं।

सुरा बघ्घी संज्ञा • Awadhi

अवध क्षेत्र का प्रसिद्ध पारंपरिक चौपाल खेल (बकरी और बाघ का खेल)।

ओसारा संज्ञा • Awadhi

मकान के सामने बना बरामदा या छज्जे के नीचे की बैठक जहाँ चौपाल लगती है।

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श्री प्रदीप सारंग

edit_note वरिष्ठ साहित्यकार एवं पर्यावरण कार्यकर्ता location_on ग्राम कमरावां, जिला बाराबंकी, उत्तर प्रदेश, भारत
40+ वर्ष साहित्य सेवा ग्रीन गैंग संस्थापक
लेखक सोशल मीडिया जुड़ें
psychology_alt साहित्यिक व जमीनी सरोकार

विगत चार दशकों से अवधी साहित्य की समृद्ध वाचिक परंपरा के संवर्धन और ग्रामीण पर्यावरण के पुनर्जीवन में संलग्न। हिंदी दैनिक समाचार पत्र सन्दौली टाइम्स के सह-संपादक के रूप में निरंतर पत्रकारिता के सरोकारों को जीने वाले सारंग जी ने बाराबंकी की मिट्टी, तालाबों और वृक्षों के संरक्षण हेतु युवाओं की 'ग्रीन गैंग' का नेतृत्व किया है।

“हारना सीखा नहीं है, जीत का मैं गीत हूँ। जुगनुओं का संग है, इंसानियत का मीत हूँ।”
— श्री प्रदीप सारंग
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लेखक विचार अस्वीकरण (Editorial & Author Disclaimer)

इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार, अनुभव और विश्लेषण पूर्णतः लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। वेबसाइट एवं संपादकीय मंडल आलेख में व्यक्त निजी दृष्टिकोण की स्वतंत्रता का सम्मान करता है। विस्तृत कानूनी शर्तों व नीतियों के लिए कृपया हमारी अस्वीकरण नीति (Disclaimer) एवं संपादकीय नीति (Editorial Policy) देखें।

साहित्य संचयन

स्वीकृत अवधी कृतियाँ व अन्य आलेख

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कुछ अच्छे लोग आलेख
20 Oct 2026 • 8 min read

कुछ अच्छे लोग

संस्मरण मेरठ यात्रा

अवधी किहानी, सुघरी -2 अवधी गद्य
20 Oct 2026 • 8 min read

अवधी किहानी, सुघरी -2

अवधी किहानी - सुघरी 2

झरिहख अवधी गद्य
18 Oct 2026 • 8 min read

झरिहख

आजु जब हम सोय कै जागेन, तौ झमाझम बारिस होत रही। झमाझम मतलब वाकई झम-झम, झम-झम कै आवाज कानन मा सुनाय परत रही।

पाठक प्रतिक्रिया व संस्मरण (Comments)

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२ विचार
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विनोद कुमार मिश्र

हैदरगढ़, बाराबंकी • 20 May 2026
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"सारंग दादा! आपने 'झरिहख' शब्द के साथ पूरे बचपन को आँगन में ला खड़ा किया। वह टीनशेड पर बूँदों का शोर, अम्मा का चूल्हे की बची आग बाहर निकाल कर कपड़े सेंकना... आज सीमेंट के कमरों में वह सोंधी खुशबू और वह अपनापा कहीं खो गया है। अवधी गद्य में ऐसा प्रामाणिक चित्रण विरले ही मिलता है।"

डॉ

डॉ. सुधीर शुक्ला

लखनऊ विश्वविद्यालय • 21 May 2026

"श्रद्धेय डॉ. भगवान वत्स जी के प्रति व्यक्त आदर और राष्ट्रीय सेवा योजना की वह दृष्टि आज भी आपकी जीवनशैली में झलकती है। रात को 1 बजे तक अखबार का संपादन और सुबह पक्षियों का कलरव—यह संस्मरण मात्र एक आलेख नहीं, ग्रामीण जीवन का सांस्कृतिक दस्तावेज है।"

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