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eco ग्रीन मॉर्निंग!
analytics 100% पारदर्शी एवं प्रत्यक्ष ज़मीनी प्रभाव (1987 से आज तक)

चार दशकों की साधना: पारदर्शी और सजीव सामुदायिक प्रभाव

बाराबंकी और अवध अंचल के गांवों, चौपालों और विद्यालयों में 50,000+ पौधरोपण, 10,000+ परिंदा जल-सकोरा सेवा और जन-जागरूकता का प्रामाणिक आंकड़ेवार लेखा-जोखा।

forest 50,000+ पौधरोपण व संरक्षण 85% से अधिक जीवित दर
nest_cam_wired_stand 10,000+ परिंदा जल-सकोरे भीषण ग्रीष्म में जलदान
cottage 150+ ग्राम चौपालें व पंचायतें बाराबंकी व फैज़ाबाद अंचल
groups 5,000+ ग्रीन व परिंदा मित्र नियमित दाना-पानी संकल्प
workspace_premium 100+ राष्ट्रीय व राज्य सम्मान राजभवन व शासन प्रशस्ति
चार प्रमुख आयाम

क्षेत्रवार सजीव बदलाव एवं दीर्घकालिक प्रभाव

forest

1. पर्यावरण संवर्धन व 'ग्रीन गैंग' आंदोलन

5 जून 2019 से स्थापित 'ग्रीन गैंग' के माध्यम से जनपद बाराबंकी के 150 से अधिक गांवों में 50,000 बरगद, पीपल, नीम और पाकड़ के वृक्षों का रोपण किया गया। अभिवादन में 'ग्रीन मॉर्निंग' का संस्कार अब विद्यालयों व चौपालों की जीवनशैली बन चुका है।

check_circle 85%+ वृक्ष जीवित दर (सुरक्षा ट्री-गार्ड)
check_circle 100+ स्कूलों में 'ग्रीन मॉर्निंग' दैनिक संस्कार
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2. परिंदा व वन्यजीव संरक्षण अभियान

ग्रीष्म ऋतु में पक्षियों के जीवन की रक्षा हेतु 10,000 से अधिक मिट्टी के सकोरे व दाना पात्र वितरित किए गए। 2016 में उत्तर प्रदेश शासन के वन मंत्री द्वारा 'वन्य जीव संरक्षण विशिष्ट प्रशस्ति पत्र' से अलंकृत।

check_circle 10,000+ मिट्टी के सकोरे छतों पर स्थापित
check_circle 500+ काष्ठ गौरैया घोंसले वितरित
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3. अवधी भाषा, साहित्य व लोक-सांस्कृतिक चेतना

अवधी भाषा के संरक्षण हेतु संस्मरण संकलन 'झरिहख', 151 छन्दबद्ध कुंडलियों का ग्रन्थ 'सारंग-कुंडलियाँ' तथा प्रतिवर्ष 16 से 31 अगस्त तक आयोजित 'तुलसी जयंती पखवारा'। जनकवि बंशीधर शुक्ल व तुलसी सम्मान से अलंकृत।

check_circle 151 अवधी कुंडलियाँ एवं काव्य ग्रन्थ
check_circle 25+ वार्षिक तुलसी जयंती पखवारा गोष्ठियाँ
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4. लोक स्वास्थ्य, रक्तदान व कोरोना योद्धा सेवा

सैकड़ों रक्तदान शिविरों का आयोजन व रेडक्रॉस सोसाइटी सम्मान। 2020 की वैश्विक महामारी में अग्रिम मोर्चे पर रहकर ग्रामीण असहायों को भोजन, दवा, मास्क वितरण एवं आपातकालीन राहत।

check_circle 100+ रक्तदान शिविर व आपातकालीन रक्त सहायता
check_circle 2020 कोरोना योद्धा विशिष्ट अलंकरण
प्रत्यक्ष परिवर्तन अध्ययन

ग्राम कमरावाँ एवं बाराबंकी में आए सजीव बदलाव का तुलनात्मक ब्योरा

history पूर्व की स्थिति (1987 से पूर्व)
  • close ग्रामीण पगडंडियों और सड़कों के किनारे छायादार वृक्षों का अभाव।
  • close गर्मी के दिनों में पक्षियों के लिए पीने का पानी न होने से भारी मृत्यु-दर।
  • close अवधी लोक-साहित्य और ग्रामीण कहावतों का लुप्तप्राय होना।
verified वर्तमान सजीव बदलाव (2026)
  • check_circle 50,000+ सुरक्षित बरगद, पीपल व नीम वृक्षों से लहलहाते हरित गलियारे।
  • check_circle 10,000+ सकोरे स्थापित; 5,000+ पंजीकृत 'परिंदा मित्र' रोज पानी भरते हैं।
  • check_circle अवधी ग्रन्थ 'झरिहख' व 151 कुण्डलियाँ प्रकाशित; विद्यालयों में 'ग्रीन मॉर्निंग' का संस्कार।
जन-गण का विश्वास

ग्रामीणों, शिक्षकों एवं स्वयंसेवक युवाओं के विचार

"सारंग जी के ग्रीन गैंग अभियान से हमारे गाँव की सड़क के दोनों ओर अब घने बरगद और नीम की छाया है। बच्चे सुबह विद्यालय में 'गुड मॉर्निंग' की जगह 'ग्रीन मॉर्निंग' बोलते हैं। यह एक नया संस्कार है।"

person
राम औतार वर्मा ग्राम प्रधान, कमरावाँ (बाराबंकी)

"गर्मी के दिनों में जब हम लोग छतों पर सकोरे में पानी भरते हैं, तो दर्जनों गौरैया और बुलबुल पानी पीने आती हैं। सारंग जी ने हमें बेज़ुबान पक्षियों के प्रति संवेदनशील बनाया है।"

person
श्रीमती सुनीता देवी पंजीकृत परिंदा मित्र, सतरिख

"अवधी साहित्य में सारंग जी की 'सारंग-कुंडलियाँ' और 'झरिहख' ग्रन्थ हमारी लोक-सांस्कृतिक पहचान को अमर बना रहे हैं। उनकी रचनाशीलता युवा पीढ़ी के लिए अनुपम प्रेरणा है।"

person
डॉ. अशोक अवस्थी अवधी साहित्य शोधार्थी, लखनऊ
volunteer_activism

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