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eco ग्रीन मॉर्निंग!
समाजसेवी • पर्यावरण प्रेमी • साहित्यकार • जन-जागरूकता प्रेरक

साहित्य, समाज, भाषा, संस्कृति और प्रकृति के लिए समर्पित एक जीवन... प्रदीप सारंग

ग्राम कमरावां, जिला बाराबंकी, उत्तर प्रदेश, भारत से शुरू होकर चार दशकों तक फैली निस्वार्थ जनसेवा — पर्यावरण संरक्षण, गौरैया व पक्षी संवर्धन, जल-सकोरा वितरण, अवधी भाषा उत्थान और युवाओं में सकारात्मक चेतना का निरंतर संचार।

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अनूठी अभिवादन शैली ग्रीन मॉर्निंग के जनक प्रदीप सारंग ग्रीन मॉर्निंग की अनूठी पहल • वैचारिक पृष्ठभूमि
विस्तार से जानें arrow_forward
verified स्वामी विवेकानंद सम्मान (1989)
military_tech गणतंत्र दिवस परेड प्रतिभागी (1987-88)
प्रदीप सारंग - समाजसेवी एवं पर्यावरणविद
संस्थापक — ग्रीन गैंग (2019) calendar_month 1987 से अनवरत जनसेवा

प्रदीप सारंग

बाराबंकी की माटी से उठकर जन-जन तक हरियाली की अलख जगाने वाले जनसेवक।

35+
schedule
वर्ष निरंतर जनसेवा 1987 से आज तक निस्वार्थ ग्रामीण व सामाजिक योगदान
15+
campaign
सक्रिय जन-अभियान ग्रीन गैंग, परिंदा संरक्षण, जल-सकोरा अभियान, अवधी संवर्धन
50+
emoji_events
सम्मान एवं पुरस्कार स्वामी विवेकानंद सम्मान (1989), राष्ट्रीय परेड सम्मान
18k+
groups
नागरिक सहभागिता बाराबंकी, सतरिख, लखनऊ व ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्यक्ष जुड़ाव
प्रदीप सारंग सम्मान समारोह मंच पर
location_home
जन्म स्थान एवं कर्मभूमि 20 अक्टूबर 1969 • ग्राम कमरावां, जिला बाराबंकी, उत्तर प्रदेश, भारत
forestपर्यावरणविद history_eduसाहित्यकार व कवि commuteसंयोजक, पटेल चेतना रथ campaignसामाजिक सलाहकार एवं उत्प्रेरक translateअवधी भाषा संरक्षक
menu_book एक परिचय — प्रदीप सारंग

जनसेवा ही साधना: एक सतत संकल्प

वर्ष 1969 की 20 अक्टूबर को भारत के प्रांत उत्तर प्रदेश में स्थित जिला बाराबंकी के ग्राम- कमरावां में जन्मे प्रदीप सारंग एक समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता, साहित्यकार एवं जनसेवक हैं, जो कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपने निरंतर सक्रिय योगदान से युवाओं में सकारात्मक एवं प्रेरणादायक वातावरण सृजित करते रहते हैं।

उनका जीवन समाज सेवा, शिक्षा, पर्यावरण-संरक्षण और जन-जागरूकता के कार्यों के लिए समर्पित है। ग्रामीण विकास, मतदाता जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, गौरैया व परिंदा संरक्षण, जल-सकोरा अभियान तथा अवधी-भाषा-संस्कृति के संरक्षण संवर्धन जैसे कार्यों में उनकी विशेष रुचि है।

“

"सुंदरता है सुमन की, मनमोहक पहचान। किन्तु सुवासित सुमन ही, चाहे सकल जहान।।
आकर्षण का माध्यम, सुंदरता की चाह। सुमनों से संसार को, सिर्फ सुरभि की चाह।।"

— प्रदीप सारंग कवि एवं सामाजिक विचारक
जन-आंदोलन एवं पहल

प्रमुख अभियान

प्रदीप सारंग द्वारा समाज के समग्र विकास के लिए विभिन्न जन-जागरूकता एवं सेवा-आधारित अभियानों का संचालन किया जा रहा है।

सभी अभियानों से जुड़ें arrow_forward
सरदार पटेल अभियान — राष्ट्रीय एकता व अखंडता
flag प्राथमिक मुख्य जन-अभियान (राष्ट्रीय एकता)

सरदार पटेल अभियान

लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के अखंड भारत, राष्ट्रीय अखंडता और सामाजिक समरसता के विचारों को युवाओं तक पहुँचाने हेतु संचालित प्रमुख अभियान। इसके माध्यम से समाज को जाति-धर्म की संकीर्णताओं से ऊपर उठाकर एक सशक्त राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित किया जाता है।

verified पटेल चेतना रथ यात्रा
verified युवा नेतृत्व संवाद
eco स्थापना: 05 जून 2019 (विश्व पर्यावरण दिवस)

हरियाली-अभियान

“ग्रीन गैंग” प्रदीप सारंग द्वारा शुरू किया गया एक प्रेरक हरियाली अभियान है, जिसका उद्देश्य जनमानस में पर्यावरण प्रेम विकसित करना है। हर दिन के अभिवादन में 'ग्रीन मॉर्निंग' का प्रयोग जन-जन के स्वभाव में प्रकृति बोध जगाता है।

check_circle 50,000+ पौधे रोपित
check_circle ग्रीन चौपाल संवाद
हरियाली-अभियान (ग्रीन गैंग) पौधरोपण
मुख्य संकल्प
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सरदार पटेल अभियान

आधुनिक भारत के शिल्पी, भारतरत्न सरदार वल्लभ भाई पटेल जी के कृतित्व व्यक्तित्व से जन-जन को परिचित कराते हुए राष्ट्रीय एकता और अखंडता को अक्षुण्ण बनाये रखने की प्रेरणात्मक वातावरण बनाना।

राष्ट्रीय एकता व सद्भाव ↗
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अवधी अभियान

"धनि अवधी जेहिं राम बखानी" अवध क्षेत्र की मातृभाषा अवधी भाषा, साहित्य, संस्कृति और लोककला का संरक्षण एवं संवर्धन करना उद्देश्य है।

साहित्यिक धरोहर संरक्षण ↗
visibility

आँखे फाउंडेशन

जन जागरण अभियान

जन जागरण अभियान ↗
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गौरैया बचाओ अभियान

गर्मियों में बेजुबान परिंदों के लिए दाना पानी की व्यवस्था हेतु प्रेरक अभियान।

जीव-दया व प्रकृति प्रेम ↗
psychiatry प्रकृति-केंद्रित जीवन शैली आंदोलन

ग्रीन गैंग — हरियाली को जन-आंदोलन बनाने की ऐतिहासिक पहल

विश्व पर्यावरण दिवस 05 जून 2019 को स्थापित। प्रदीप सारंग का विचार है कि जब हमारी जुबां पर हरियाली होगी, तभी हमारे आंगन और धरा पर हरियाली टिकेगी।

lightbulb वैचारिक पृष्ठभूमि • अभिनव अभिवादन क्रांति का उदय

धरती पर हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से 05 जून 2019 को विश्व पर्यावरण दिवस पर ग्रीन गैंग की स्थापना हो जाने के बाद, इसकी वैचारिकी का साहित्य सृजित करना था। इसी चिन्तन में श्री सारंग के मन मे विचार आया कि क्यों न हरियाली पर काम करने वालों के लिए अलग अभिवादन शैली का विकास किया जाए। जितने धर्म, सम्प्रदाय, वैचारिकी, अस्तित्व और प्रचलन में हैं सभी के अनुयायी स्वतः एक अलग अभिवादन शैली अपनाते हैं। जैसे— जै राम, जै श्रीराम, ऊँ नमः शिवाय, राधे राधे, जय गुरुदेव, आदाब अर्ज, अस्सलाम वालेकुम, सत श्री अकाल, गुड मॉर्निंग, जय जिनेन्द्र, नमो बुद्धाय, जय हिंद, जय सरदार, जय पटेल, जय भीम आदि इत्यादि।

महीनों चिंतन के बाद यह सुपरिणाम मिला कि एक अलग तरह की अभिवादन शैली का आविष्कार हो। चूँकि हरियाली संवृद्धि में संलग्न लोग विभिन्न लिंग, जाति, धर्म, सम्प्रदाय, राष्ट्रीयता के लोग हैं अतः अभिवादन में एक ऐसा शब्द अपनाया जाए जिससे किसी को अनुचित और असुविधाजनक न लगे। और इस प्रकार प्रदीप सारंग जी द्वारा एक अनूठी अभिवादन शैली— ग्रीन मॉर्निंग और हरित प्रभात का आविष्कार किया गया।

menu_book संवाद, स्व. हरिप्रसाद वर्मा जी से चर्चा एवं 6 अकाट्य तर्क
सम्पूर्ण वैचारिक दर्शन व 6 तर्क पढ़ें arrow_forward
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ग्रीन-मॉर्निंग Green Morning

'गुड मॉर्निंग' का हरित विकल्प। सुबह की पहली किरण के साथ धरती के प्रति कृतज्ञता और पौधे लगाने का संकल्प।

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ग्रीन-आफ्टरनून Green Afternoon

दोपहर के श्रम में छायादार वृक्षों और पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था की याद दिलाता हरित अभिवादन।

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ग्रीन-इवनिंग Green Evening

शाम के वक्त चौपालों और परिवारों में हरियाली, स्वच्छता व पर्यावरण संवाद को प्रेरित करता संवाद।

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ग्रीन-नाइट Green Night

दिन के समापन पर प्रकृति के संतुलन और आने वाले कल को और अधिक हरा-भरा बनाने का शांत संकल्प।

menu_book ग्रीन गैंग / पर्यावरण सेना नियमावली • धारा 38 से 43

गुड मॉर्निंग की जगह ग्रीन मॉर्निंग क्यों...?

ग्रीन गैंग/पर्यावरण सेना की नियमावली की धारा 38 से 43 को पढ़ें और जानें कि गुड मार्निंग की जगह ग्रीन मार्निंग क्यों...?

38 सांस्कृतिक पहचान

प्रत्येक पर्यावरण सैनिक गुड मॉर्निंग के स्थान पर ग्रीन मॉर्निंग, सुप्रभात या शुभ प्रभात के स्थान पर हरित प्रात व हरित प्रभात, लिखे और बोले ऐसी अपेक्षा है। यही ग्रीन गैंग के कल्चर की अपनी विशेष पहचान होगी।

39 रंग व अर्थ

ग्रीन=हरा और हरा का अर्थ होता है खुशहाली और सुख समृद्धि संपन्नता। भारत देश के राष्ट्रीय ध्वज में प्रयुक्त हरा रंग भी यही अर्थ देता है।

40 साहित्यिक प्रमाण

“मेरी भव बाधा हरो, राधा नागरि सोय।
जा तन की झाईं पड़े, श्याम हरित दुति होय।।”

— महाकवि बिहारी

हिंदी के प्रसिद्ध लेखक बिहारी जी ने भी हरित-दुति का अर्थ प्रसन्न मुद्रा से लगाया है। राधा गोरी है यानी पीली हैं। श्याम नीले, सांवरे रँग के हैं। बिहारी जी ने लिखा है कि जब राधा की परछाई पड़ती है तो श्याम यानी कृष्ण भी प्रसत्र हो जाया करते हैं। वैसे भी नीला+ पीला रंग मिलने पर हरा रंग बनकर तैयार होता है।

41 खिला बनाम मुरझाया

फूलों और पेड़ों की तरह मनुष्य के चेहरे के लिए भी "खिला है, मुरझाया है" बोला जाता है। इसका भी अर्थ खिला यानी हरा भरा यानी प्रसन्न है। हरियाली कम यानी मुरझाया हुआ है, यानी प्रसन्नता कम।

42 एवरग्रीन (Evergreen)

अंग्रेजी में प्रायः बोला जाता है- एवरग्रीन/Evergreen. इसका अर्थ है सदाबहार यानी सदैव हरा भरा रहने वाला। मनुष्य के सदाबहार अथवा हरा भरा रहने से मतलब है खुशहाल/प्रसन्न रहना।

43 सिद्ध निष्कर्ष

ग्रीन गैंग/पर्यावरण सेना नियम निर्देश की धारा 38 से 43 द्वारा सिद्ध हो जाता है कि गुड मॉर्निंग का अर्थ सिर्फ सुप्रभात अथवा शुभ प्रभात होगा, जबकि ग्रीन मॉर्निंग का अर्थ हरित प्रभात यानी खुशहाल प्रात अथवा सुख सम्पन्न प्रात/प्रभात होगा।

eco

हमें विश्वास है कि आप आगे से गुड मॉर्निंग की जगह ग्रीन मॉर्निंग बोलना अवश्य आरम्भ करेंगे। साथ ही कुछ मित्रों परिचितों को ग्रीन मॉर्निंग बोलने हेतु प्रेरित भी करेंगे।

प्रदीप सारंग संस्थापक — ग्रीन गैंग / पर्यावरण सेना

आप भी बनें "ग्रीन गैंग" के हरित साथी

अपने दैनिक संवाद में ग्रीन मॉर्निंग अपनाएं और अपने गांव/मोहल्ले में कम से कम 5 फलदार अथवा छायादार पौधे अवश्य लगाएं।

group_add ग्रीन गैंग सदस्यता फॉर्म भरें
धरातल पर परिणाम

बदलाव की कहानियाँ (Case Studies)

समस्या से समाधान तक की वास्तविक जन-यात्रा — कैसे छोटे-छोटे सामूहिक कदमों ने बाराबंकी में बड़े बदलाव रचे।

forest पर्यावरण संवाद

सतरिख व बाराबंकी में ग्रीन चौपाल

समस्या:

गाँव की सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर कटते पेड़ और घटता हरित आवरण।

पहल:

माननीय वन मंत्री जी (उत्तर प्रदेश) की उपस्थिति में जनसंवाद व सामूहिक पौधा रोपण।

परिणाम:

500+ ग्रामीण परिवारों ने स्वेच्छा से अपने घर के बाहर 'एक पौधा अपनी संतान के नाम' लगाया।

स्थान: सतरिख, बाराबंकी सफलता दर: 92%
water_drop परिंदा रक्षक

भीषण ग्रीष्म में जल-पात्र वितरण

समस्या:

मई-जून की 45°C गर्मी में जलस्रोतों के सूखने से परिंदों और गौरैयों की असामयिक मृत्यु।

पहल:

उत्तर प्रदेश के जिला बाराबंकी सहित आसपास के जिलों में आँखें फाउंडेशन के संस्थापक प्रदीप सारंग द्वारा हजारों जल सकोरों व घोंसलों के वितरण

परिणाम:

संचालित जागरूकता अभियान के परिणाम स्वरूप अनेक परिंदा-प्रेमी परिवारों को हरदिन छतों पर अवशेष जूठन व दाना तथा बर्तनों में पानी की व्यवस्था करने का अभिप्रेरण अभियान।

स्थान: ग्रामीण अंचल 2500+ सकोरे सक्रिय
water_drop परिंदा संरक्षण

मिट्टी के जल-सकोरे व गौरैया बचाओ अभियान

समस्या:

भीषण गर्मी में पानी और भोजन के अभाव में बेजुबान पक्षियों एवं विलुप्त होती गौरैया का संकट।

पहल:

प्रदीप सारंग द्वारा 10,000+ मिट्टी के जल-सकोरों का वितरण एवं युवाओं द्वारा नियमित दाना-पानी व्यवस्था।

परिणाम:

हजारों परिंदों को मिला जीवन और ग्रामीण युवाओं में बेजुबानों के प्रति करुणा का प्रसार।

स्थान: बाराबंकी (कमरावां व ग्रामीण अंचल) 10,000+ जल-सकोरे वितरित
इतिहास एवं पड़ाव

चार दशकों की सेवा यात्रा (1987 से आज तक)

कमरावां के एक संवेदनशील किशोर से लेकर राष्ट्रीय मंचों तक समाज व पर्यावरण की अथक साधना

1987 – 1988

इंडिया गेट राष्ट्रीय गणतंत्र दिवस परेड में सहभागिता

नई दिल्ली में 26 जनवरी गणतंत्र दिवस राष्ट्रीय परेड में युवा दल के रूप में शामिल होकर अनुशासन, राष्ट्रीय सेवा और लोक कल्याण का सर्वोच्च पाठ सीखा।

1989

माननीय राज्यपाल (उ.प्र.) द्वारा 'स्वामी विवेकानंद सम्मान'

उत्कृष्ट समाज सेवा, युवा नेतृत्व और ग्रामीण विकास कार्यों के लिए उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल महोदय द्वारा स्वामी विवेकानंद पुरस्कार प्रदान किया गया।

2010 – 2018

कपड़ा-बैंक, गौरैया संवर्धन व मतदाता चेतना विस्तार

ग्रामीण बाराबंकी में जरूरतमंदों के लिए कपड़ा बैंक की स्थापना, परिंदों के लिए दाना-पानी अभियान और लोकतंत्र सुदृढ़ीकरण हेतु व्यापक मतदाता जागरूकता रैलियां।

05 जून 2019

'ग्रीन गैंग' की ऐतिहासिक स्थापना व 'ग्रीन मॉर्निंग' सूत्रपात

विश्व पर्यावरण दिवस पर धरती पर हरियाली बढ़ाने और जनमानस के दैनिक अभिवादन में 'ग्रीन मॉर्निंग' की वैज्ञानिक और भावनात्मक नींव रखी गई।

2026 (वर्तमान)

स्वरचित 'सारंग-कुंडलियाँ' एवं साझा संग्रह 'काव्य-मंजरी'

151 स्वरचित कुंडलियों के काव्य संग्रह का ऐतिहासिक प्रकाशन और अवधी लोक संस्कृति के संरक्षण हेतु साहित्यकारों का वृहद समागम।

राष्ट्रीय व राजकीय मान्यता

सम्मान एवं उपलब्धियाँ

समाज, संस्कृति और पर्यावरण के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान के लिए मिले प्रमुख अलंकरण

military_tech वर्ष 1989 • राजभवन

स्वामी विवेकानंद सम्मान

तत्कालीन माननीय राज्यपाल उत्तर प्रदेश द्वारा उत्कृष्ट समाज सेवा व युवा चेतना सृजन हेतु प्रदान किया गया सर्वोच्च सम्मान।

प्रदाता: उत्तर प्रदेश शासन
flag 1987 – 1988 • नई दिल्ली

गणतंत्र दिवस परेड सम्मान

इंडिया गेट पर 26 जनवरी राष्ट्रीय गणतंत्र दिवस परेड में राष्ट्रीय सेवा योजना अंतर्गत विश्वविद्यालय के श्रेष्ठ स्वयं सेवक के रूप में चयनित होकर राष्ट्रीय सेवा कार्यों के प्रतिनिधित्व हेतु प्रशस्ति पत्र।

स्थल: इंडिया गेट, नई दिल्ली
forest हरित क्रांति सम्मान

पर्यावरण गौरव सम्मान

ग्रीन चौपाल अभियान तथा बाराबंकी व सतरिख में वृहद जनसहभागिता पौधरोपण मुहिम हेतु वन विभाग व नागरिक मंचों द्वारा प्रदत्त।

पहल: ग्रीन गैंग अभियान
history_edu साहित्यिक संवर्धन

अवधी भाषा शिरोमणि सम्मान

'सारंग-कुंडलियाँ' एवं अवधी लोक-गद्य के संरक्षण तथा ग्रामीण नवोदित कवियों को मंच प्रदान करने हेतु विशेष सारस्वत सम्मान।

मंच: अवधी साहित्य परिषद
मीडिया कवरेज

अखबारों के पन्नों से (Newspaper Cuttings)

दैनिक जागरण, अमर उजाला, राष्ट्रीय सहारा आदि प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित प्रदीप सारंग के अभियानों की प्रामाणिक कतरनें

verified आधिकारिक प्रेस अभिलेखागार
संस्थान मनायेगा गोस्वामी तुलसीदास पखवारा
13 अगस्त 2026

संस्थान मनायेगा गोस्वामी तुलसीदास पखवारा

साहित्य सम्मेलन एवं अवधी गोष्ठी
पर्यावरण प्रेमी प्रदीप सारंग का जन्मदिन हरित संकल्प के संग
11 अगस्त 2026

पर्यावरण प्रेमी प्रदीप सारंग का जन्मदिन हरित संकल्प के संग

ग्रीन मॉर्निंग अभियान को जन समर्थन
लेखों और काव्य मंजरी का हुआ भव्य विमोचन
07 जुलाई 2026

लेखों और काव्य मंजरी का हुआ भव्य विमोचन

साहित्यिक अनुष्ठान एवं परिचर्चा
सतरिख में सजी ग्रीन चौपाल, वन मंत्री ने की सराहना
04 जुलाई 2026

सतरिख में सजी ग्रीन चौपाल, वन मंत्री ने की सराहना

पर्यावरण संवर्धन का अनूठा मॉडल
आयोजन एवं संगम

कार्यक्रम व गतिविधियाँ (Events)

आगामी व पूर्व में संपन्न हुए साहित्यिक, पर्यावरणीय एवं सामाजिक समागम

सभी कार्यक्रम देखें arrow_forward

आगामी कार्यक्रम (Upcoming Events)

पटेल चेतना रथ
आगामी 22 Nov 2026

पटेल चेतना रथ

गत वर्षों की भाँति इस वर्ष भी पटेल जी के कृतित्व व्यक्तित्व से जनजन को परिचित कराने के उद्देश्य, से 22 नवम्बर से 15 दिसम्बर तक  22 दिवसीय  पटेल चेतना रथ का संचालन सरदार पटेल समाजोत्थान ट्रस्ट द्वारा किया जा रहा है। यह रथ जनपद बाराबंकी के लगभग 6 गाँवों में प्रतिदिन पहुँचेगा। जहाँ पटेल जी सामूहिक आरती होगी। संकल्प वाचन होगा। एक संगोष्ठी और कविसम्मेलन होंगे।

location_on बाराबंकी, उत्तर प्रदेश, भारत
शीतकालीन परिंदा संरक्षण व जल-सकोरा वितरण अभियान
आगामी 15 Nov 2026

शीतकालीन परिंदा संरक्षण व जल-सकोरा वितरण अभियान

पर्यावरण चेतना तथा शीतकालीन पक्षी संरक्षण एवं ग्रामीण विद्यालयों में विद्यार्थियों संग पौधरोपण व हरित संदेश।

location_on बाराबंकी व आसपास के सीमांचल क्षेत्र
माटी की बोली • अवधी संपदा

साहित्य और अवधी संस्कृति (Literary Works)

अवधी गद्य, आंचलिक रेखाचित्र और लोकजीवन की सजीव अभिव्यक्ति — प्रदीप सारंग की लेखनी से सीधे

अवधी गद्य menu_book

सुघरी

"मेला जाय की खुशी मा, गोबर की खेप लइकै जाय रही 'सुघरी' के कदमन की चाल आजु अपने आपै कुछ बढ़ी हुई है..."

अवधी ग्रामीण समाज में एक मेहनतकश स्त्री के स्वाभिमान, सहज उल्लास और आंचलिक पर्व-संस्कृति का अत्यंत मार्मिक व यथार्थवादी शब्द-चित्र।

लेखक: प्रदीप सारंग पूरी रचना पढ़ें arrow_forward
साक्षात्कार व संस्मरण record_voice_over

झरिहख (वर्षा ऋतु का ग्रामीण दृश्य)

"आजु जब हम सोय कै जागेन, तौ झमाझम बारिस होत रही। झमाझम मतलब वाकई झम-झम, झम-झम कै आवाज कानन मा सुनाय परत रही..."

बारिश की पहली झड़ी, खपरैल से गिरती जलधाराएं, कीचड़ से भरी पगडंडियां और किसान के मन की उमंग का खालिस अवधी जुबान में सजीव प्रवाह।

संस्मरण: प्रदीप सारंग पूरा संस्मरण पढ़ें arrow_forward
edit_note स्वरचित 151 कुंडलियों का संकलन

"सारंग-कुंडलियाँ" — लोक जीवन के छंदबद्ध सरोकार

कुण्डलियाँ छंद की प्राचीन समृद्ध परंपरा को जीवित रखते हुए समकालीन सामाजिक विद्रूपताओं, प्रकृति-प्रेम और मानवीय मूल्यों पर आधारित 151 मौलिक कुंडलियाँ।

"पेड़ केवल लकड़ी नहीं, हमारी सांसों का ऋण हैं। हर दिन की शुरुआत ग्रीन मॉर्निंग से करें।"
प्रदीप सारंग • बाराबंकी
नागरिक सहभागिता

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अभियानों को गतिशील बनाने हेतु अपने रुचि अनुरूप स्थानीय स्तर पर इकाई के गठन करें।

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अपने विद्यालय, ग्राम पंचायत या संस्थान में अभियान का आयोजन करवाएं।

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निवास एवं कार्यक्षेत्र

ग्राम कमरावां, जिला बाराबंकी, उत्तर प्रदेश, भारत

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eco आँखें फाउंडेशन द्वारा वित्त पोषित तथा प्रदीप सारंग द्वारा संस्थापित "ग्रीन गैंग"

स्वयंसेवक / सदस्यता सहभागिता प्रपत्र

कृपया अपनी सही जानकारी भरें ताकि आपके निकटतम क्षेत्र के ग्रीन गैंग समन्वयक आपसे संपर्क कर सकें।

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सदस्यता दो प्रकार की है-

1 ग्रीन स्वयंसेवक ₹500 • एक बार

एक बार 500 रुपये जमा करने वाले व्यक्ति को ग्रीन स्वयं सेवक "ग्रीन वॉलंटियर" तथा "हरित स्वयंसेवक" कहा जायेगा।

2 स्वयंसेवक ₹50 • १ वर्ष

50 रुपये जमा करके कोई व्यक्ति एक वर्ष के लिए "वालंटियर" तथा "स्वयंसेवक" कहा जायेगा।

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ग्रीन स्वयंसेवक शुल्क भुगतान — ₹500

ग्रीन स्वयंसेवक ("ग्रीन वॉलंटियर" / "हरित स्वयंसेवक") हेतु ₹500/- का भुगतान कर स्क्रीनशॉट अपलोड करें।

₹500 • एक बार / स्थायी
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