ग्रीन गैंग: हरियाली क्रांति, पौधरोपण एवं 'ग्रीन मॉर्निंग' का अभिनव संस्कार
प्रदीप सारंग द्वारा संस्थापित 'ग्रीन गैंग' आंदोलन — 50,000+ बरगद, पीपल, नीम और पाकड़ के वृक्षों का रोपण एवं 150+ गांवों व 100+ विद्यालयों में दैनिक प्रकृति-प्रेम का संस्कार।
ग्रीन गैंग: जानकारी, नियम एवं निर्देश संकल्प-पत्र
5 जून 2019 को शहीद उद्यान बाराबंकी में 111 संकल्पवान साथियों द्वारा अंगीकृत एवं संस्थापक प्रदीप सारंग जी द्वारा प्रख्यापित 43 स्वर्णिम नियम।
ग्रीन गैंग जानकारी, नियम, निर्देश
सरकारी/अर्धसरकारी विभाग, सामाजिक संस्था, संगठन, ट्रेड यूनियन, स्कूल, कालेज, अस्पताल, एन एस एस, स्काउट, एन सी सी, युवक मंगल दल, एन वाई के, साहित्य, पत्रकारिता, किसान सहित किसी भी पेशा/कार्य व्यवसाय से जुड़े लोग "उद्देश्य" से प्रेरित होकर तथा नियम/निर्देश से सहमत होकर, हरियाली बढ़ाने की इस मुहिम "ग्रीन-गैंग" का हिस्सा बन सकेंगे।
ग्रीन गैंग एक मूवमेंट है इसलिए इसमें समय का कोई प्रतिबन्ध नहीं है जिसके पास जब जितना समय हो उतना काम करे। जब न हो समय, तो कोई शिकवा शिकायत नहीं। दरअसल इस मुहिम की कुछ अलग तरह की विशेषताएं हैं।
निर्देश प्राप्त करने के लिए। सुझाव देने के लिए। राय मशविरा के लिए। एक दूसरे को विशेष मौकों पर बधाई देने के लिए।
मेरी भव बाधा हरो, राधा नागरि सोय।
जा तन की झाईं पड़े, श्याम हरित दुति होय।।
हिंदी के प्रसिद्ध लेखक बिहारी जी ने भी हरित-दुति का अर्थ प्रसन्न मुद्रा से लगाया है।
राधा गोरी है यानी पीली हैं। श्याम नीले, सांवरे रँग के हैं। बिहारी जी ने लिखा है कि जब राधा की परछाई पड़ती है तो श्याम यानी कृष्ण भी प्रसत्र हो जाया करते हैं। वैसे भी नीला+ पीला रंग मिलने पर हरा रंग बनकर तैयार होता है।
गुड मॉर्निंग की जगह 'ग्रीन मॉर्निंग' और 'हरित प्रभात' क्यों...?
विश्व पर्यावरण दिवस 05 जून 2019 से आरम्भ हुई चिंतन यात्रा, संस्थापक सदस्य स्व. हरिप्रसाद वर्मा जी से ऐतिहासिक संवाद और प्रदीप सारंग जी द्वारा खोजे गए 6 अकाट्य दार्शनिक तर्क।
1. उत्पत्ति एवं सर्वसमावेशी अभिवादन की खोज
5 जून 2019 • विश्व पर्यावरण दिवस पर वैचारिक मंथनधरती पर हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से 05 जून 2019 को विश्व पर्यावरण दिवस पर ग्रीन गैंग की स्थापना हो जाने के बाद, इसकी वैचारिकी का साहित्य सृजित करना था। इसी चिन्तन में श्री सारंग के मन मे विचार आया कि क्यों न हरियाली पर काम करने वालों के लिए अलग अभिवादन शैली का विकास किया जाए। जितने धर्म, सम्प्रदाय, वैचारिकी, अस्तित्व और प्रचलन में हैं सभी के अनुयायी स्वतः एक अलग अभिवादन शैली अपनाते हैं। जैसे— जै राम, जै श्रीराम, ऊँ नमः शिवाय, राधे राधे, जय गुरुदेव, आदाब अर्ज, अस्सलाम वालेकुम, सत श्री अकाल, गुड मॉर्निंग, जय जिनेन्द्र, नमो बुद्धाय, जय हिंद, जय सरदार, जय पटेल, जय भीम आदि इत्यादि।
महीनों चिंतन के बाद यह सुपरिणाम मिला कि एक अलग तरह की अभिवादन शैली का आविष्कार हो। चूँकि हरियाली संवृद्धि में संलग्न लोग विभिन्न लिंग, जाति, धर्म, सम्प्रदाय, राष्ट्रीयता के लोग हैं अतः अभिवादन में एक ऐसा शब्द अपनाया जाए जिससे किसी को अनुचित और असुविधाजनक न लगे। और इस प्रकार प्रदीप सारंग जी द्वारा एक अनूठी अभिवादन शैली— ग्रीन मॉर्निंग और हरित प्रभात का आविष्कार किया गया।
“श्री सारंग का कहना है कि निरंतर चिंतन का परिणाम रहा कि अभिनव अभिवादन शैली का आविष्कार हो गया। गुड मॉर्निंग के स्थान पर ग्रीन मॉर्निंग का चयन किया। हमको अपनी बुद्धि पर इस नई खोज पर स्वयं को बहुत अच्छा लग रहा है कि हमने एक नया शब्द अभिवादन के लिए खोज लिया है।”
2. संस्थापक सदस्य स्व. हरिप्रसाद वर्मा जी से संवाद एवं तर्कों की खोज
एक विचार की परीक्षा • संशय से समाधान तकश्री सारंग ने अनेक तर्क खोजे कि क्यों ग्रीन मॉर्निंग, क्यों हरित प्रभात या हरित प्रात? हम किसी को हर सुबह गुड मॉर्निंग बोलकर विश करते हैं कि आपकी सुबह शुभ हो। यहाँ श्री सारंग जी का तर्क है कि गुड शब्द के अर्थ और ग्रीन शब्द के अर्थ में जमीन-आसमान जैसा अंतर है। गुड शब्द का अर्थ सिर्फ शुभ है, अच्छा है जबकि ग्रीन शब्द के अर्थ में बहुत आयाम हैं।
श्री सारंग जी बताते हैं कि जब पहली बार ग्रीन गैंग के संस्थापक सदस्य स्मृति शेष बड़े भाई हरिप्रसाद वर्मा जी से इस नई अभिवादन शब्द— "ग्रीन मॉर्निंग" पर बात हुई तो श्री वर्मा जी का पहला सवाल था कि "गुड मॉर्निंग की जगह ग्रीन मॉर्निंग क्यों?"
श्री वर्मा जी को तत्काल समुचित उत्तर नहीं दिया जा सका किन्तु उन्हें संतुष्ट करने की हमने भरपूर कोशिश की। हमें लगा कि श्री वर्मा जी संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने हमारी भावनाओं को समझा और यह कहकर चर्चा को समाप्त किया कि—
“समाज किसी नए प्रयोग को बहुत जल्दी स्वीकार नहीं करता है। अभी इस पर और चिंतन करो।”
श्री सारंग जी के अनुसार— हमारी चिंता बढ़ गयी और जो उत्साह बना हुआ था उसमें कुछ कमी भी आई। लेकिन आदतन हमने हार नहीं मानी। कुछ तर्क गढ़ने लगे कि परम्परागत रूप से चले आ रहे गुड मॉर्निंग के स्थान पर ग्रीन मॉर्निंग क्यों? हमने कुछ निम्नलिखित 6 तर्क खोजकर इकट्ठा किये:
प्रदीप सारंग द्वारा प्रतिपादित 6 अकाट्य तर्क
चैतन्य रूप में जीवन में अपनाने की जरूरत
ग्रीन गैंग एक नई विचारधारा को चैतन्य रूप में जीवन में अपनाने की जरूरत है। किसी के द्वारा वृक्षारोपण करना एक उत्कृष्ट कार्य है किन्तु हरियाली की चैतन्य वैचारिकी को धारण करके वृक्षारोपण करना एक अलग प्रभावकारी स्थिति उत्पन्न करेगा। यह चैतन्यता ग्रीन गैंग के कल्चर की पहचान होगी।
'गुड' बनाम 'ग्रीन' — आयामों का अंतर
गुड का अर्थ होता है शुभ और अच्छा। हम हर सुबह किसी को गुड मॉर्निंग बोलकर उसे विश करते हैं शुभकामनाएं प्रदान करते हैं कि आपकी यह सुबह यह प्रातः शुभ हो अच्छी हो। जबकि ग्रीन का अर्थ बहुत व्यापक है। इसमें अनेक आयाम समाहित हैं।
तिरंगे का हरा रंग: सुख व कृषि संपन्नता
ग्रीन = हरा। हरा रंग भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे में है। यहाँ हरा रंग सुख, कृषि गत संपन्नता और समृद्धता तथा हरियाली संवर्धन का अर्थ देता है। यानी ग्रीन शब्द में ये भाव संपदा समाहित है।
महाकवि बिहारी जी का दोहा व हरित-दुति
“मेरी भव बाधा हरो, राधा नागरि सोय।
जा तन की झाईं पड़े, श्याम हरित दुति होय।।”
हिंदी के प्रसिद्ध लेखक बिहारी जी ने भी हरित-दुति का अर्थ प्रसन्न मुद्रा से लगाया है। राधा गोरी (पीली) हैं, श्याम नीले/सांवरे रंग के हैं। राधा की परछाई पड़ने पर श्याम आह्लादित हो जाते हैं। वैसे भी नीला+पीला रंग मिलने पर हरा रंग बनता है। यहाँ सिद्ध है कि ग्रीन के अर्थ में ऐसी प्रसन्नता और ऐसा आह्लाद भी समाहित है।
खिला बनाम मुरझाया: चेहरे का भाव
फूलों और पेड़ों की तरह मनुष्य के चेहरे के लिए भी "खिला है, मुरझाया है" बोला जाता है। इसका भी अर्थ खिला यानी हरा-भरा यानी प्रसन्न है। हरियाली कम यानी मुरझाया हुआ है, यानी प्रसन्नता कम।
एवरग्रीन (Evergreen): सदैव खुशहाल
अंग्रेजी में प्रायः बोला जाता है— एवरग्रीन/Evergreen. इसका अर्थ है सदाबहार यानी सदैव हरा भरा रहने वाला। मनुष्य के सदाबहार अथवा हरा भरा रहने से मतलब है सदैव खुशहाल रहना, सदैव प्रसन्न रहना।
गुड शब्द की अपेक्षा ग्रीन शब्द कई गुना उत्तम व श्रेष्ठ है
इस प्रकार श्री सारंग जी के द्वारा खोजे गए उपरोक्त तर्कों से स्वतः सिद्ध हो जाता है कि गुड मॉर्निंग का अर्थ सिर्फ सुप्रभात अथवा शुभ प्रभात होगा, जबकि ग्रीन मॉर्निंग का अर्थ— हरित प्रभात यानी खुशहाल प्रात अथवा सुख सम्पन्न, समृद्ध प्रात/प्रभात होगा। यहाँ ग्रीन मॉर्निंग की इस विश में हृदय की भावनाओं में आह्लाद की उपस्थिति की स्थिति से भी है। भाव संपदा की दृष्टि से गुड शब्द की अपेक्षा ग्रीन शब्द कई गुना उत्तम है, श्रेष्ठ है।
प्रेरणादायक चर्चाओं का परिणाम है कि आज हजारों लोग अभिवादन शैली में गुड मॉर्निंग के स्थान पर ग्रीन मॉर्निंग, गुड अफ्टरनून के स्थान पर ग्रीन आफ्टरनून, गुड इवनिंग के स्थान पर ग्रीन इवनिंग और गुड नाइट के स्थान पर ग्रीन नाइट को अपना रहे हैं। इसी प्रकार सुप्रभात या शुभ प्रात के स्थान पर हरित प्रभात, हरित प्रात, हरित सुबह तथा क्रमशः हरित दोपहर, हरित संध्या, हरित साँझ, हरित रात्रि आदि।
'ग्रीन गैंग' आंदोलन के चार मुख्य आधार स्तंभ
1. 'ग्रीन मॉर्निंग' दैनिक अभिवादन संस्कार
विद्यालयों, चौपालों और सार्वजनिक जीवन में 'गुड मॉर्निंग' की जगह 'ग्रीन मॉर्निंग' (Green Morning) बोलने का शिष्टाचार। यह शब्द प्रत्येक व्यक्ति को रोज़ सवेरे प्रकृति के प्रति अपने नैतिक कर्तव्य का स्मरण दिलाता है।
2. पारिवारिक मांगलिक अवसरों पर पौध संकल्प
जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ अथवा पूर्वजों की स्मृति में पौधा रोपने और उसका संरक्षण करने का पारिवारिक संकल्प। पर्यावरण संवर्धन को पारिवारिक उत्सव का पावन भाग बनाया गया।
3. देसी छायादार व फलदार वृक्षों को प्राथमिकता
विदेशी सुबबूल या यूकेलिप्टस के बजाय अवध की जलवायु के अनुकूल बरगद, पीपल, नीम, पाकड़, महुआ और आम के देशी वृक्षों का रोपण, जो प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन और पक्षियों को प्राकृतिक आश्रय प्रदान करते हैं।
4. ग्राम युवा दस्ता एवं ट्री-गार्ड सुरक्षा
प्रत्येक गाँव में युवा स्वयंसेवकों का दस्ता गठित किया जाता है। प्रत्येक पौधे को ट्री-गार्ड से सुरक्षित कर 10 पौधों के नियमित जल व संरक्षण की जिम्मेदारी एक युवा प्रहरी को सौंपी जाती है।
ग्रीन गैंग की पारदर्शी एवं सहभागी कार्यशैली
ग्राम चौपाल गठन
गांव में युवाओं, किसानों एवं विद्यार्थियों की बैठक कर पर्यावरण संरक्षण और ग्रीन गैंग शाखा का गठन किया जाता है।
पौध गोद लेना व ट्री-गार्ड
स्वयंसेवकों को देशी पौध एवं सुरक्षा ट्री-गार्ड वितरित किए जाते हैं। प्रत्येक पौधा किसी विशिष्ट व्यक्ति को गोद दिया जाता है।
'ग्रीन मॉर्निंग' दैनिक देखभाल
युवा प्रहरी प्रतिदिन प्रातः 'ग्रीन मॉर्निंग' के साथ मिट्टी की नमी जांचते हैं तथा पौधों की सिंचाई व निराई सुनिश्चित करते हैं।
ग्रीन मॉर्निंग स्टिकर्स
नियम 31 के अनुसार समन्वयक एवं पर्यावरण सैनिक इन आधिकारिक स्टिकर्स को डाउनलोड करें एवं अपने व्हाट्सएप ग्रुप व सोशल मीडिया पर साझा करें।