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eco ग्रीन मॉर्निंग!
eco जन-सरोकार व पर्यावरण संरक्षण • प्रदीप सारंग की पहल

अवधी अभियान

हिंदी एवं अवधी भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के लिए यह अभियान कार्यरत है। साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखा है।

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"जब भीषण गर्मी में नदियां और तालाब सूख जाते हैं, तब हमारे आंगन और छतों पर रखे मिट्टी के सकोरे ही परिंदों के लिए जीवन बन जाते हैं। यह केवल जलदान नहीं, मानवता का संवेदनशील कर्तव्य है।"

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प्रदीप सारंग संस्थापक, परिंदा व हरियाली अभियान
अवधी  अभियान
सकोरा सेवा • ग्राम सतरिख

ग्रीष्म ऋतु में प्यास से व्याकुल परिंदों को निरंतर अमृत-जल उपलब्ध कराना

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गौरैया बसेरा पारंपरिक काष्ठ घोंसले
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बाल-चेतना टोली स्कूली छात्रों की सेवा
potted_plant निशुल्क वितरण
25,000+ मिट्टी के सकोरे (जल-पात्र)

कुम्हारों से सीधे खरीद कर आमजन व विद्यालयों में वितरित

domain क्षेत्रीय विस्तार
80+ गाँव एवं शिक्षण संस्थान

देवा, सतरिख, हैदरगढ़, रामनगर एवं फतेहपुर ब्लॉक आच्छादित

history_edu अविरल निष्ठा
12+ वर्ष निरंतर ज़मीनी सेवा

प्रत्येक वर्ष 45°C तापमान में विशेष सकोरा अभियान संचालन

volunteer_activism सक्रिय परिवार
5,000+ जागरूक 'परिंदा मित्र'

जो रोज़ सवेरे अपनी छतों व आँगनों में दाना-पानी भरते हैं

menu_book अभियान का विस्तृत विवरण

अवधी अभियान — विस्तृत विवरण व लक्ष्य

अवध क्षेत्र की बोली भाषा अवधी है। गोस्वामी तुलसीदास ने अवधी भाषा में ही रामचरितमानस की रचना की। “धनि अवधी जेहिं राम बखानी...” अवधी के आदिकवि मुल्ला दाऊद माने जाते हैं, जिन्होंने “चंदायन” जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथ की रचना कर इस भाषा को साहित्यिक गरिमा प्रदान की। उत्तर प्रदेश के जनपद बाराबंकी के ग्राम कमरावां निवासी कवि, पत्रकार एवं सोशल रिसर्चर प्रदीप सारंग जी अवधी भाषा, साहित्य, संस्कृति एवं कला के संरक्षण, संवर्धन और उन्नयन हेतु निरंतर सक्रिय हैं। वे राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त अवधी पुरोधा डॉ. राम बहादुर मिश्रा जी के मार्गदर्शन में वर्षों से कार्य कर रहे हैं। अवधी के लिए समर्पित पंजीकृत संस्था “अवध भारती संस्थान” में डॉ. राम बहादुर मिश्रा संस्थापक अध्यक्ष हैं, जबकि प्रदीप सारंग कार्यकारी सचिव के रूप में महत्वपूर्ण दायित्व निभा रहे हैं। साथ ही वे नेपाल भारत अवधी परिषद के सचिव भी हैं। पिछले 32 वर्षों से निरंतर प्रकाशित हो रही त्रैमासिक पत्रिका “अवध ज्योति” के प्रबंध-संपादक के रूप में भी उनका योगदान उल्लेखनीय है। अपनी मातृभाषा के प्रति समर्पित श्री सारंग वर्षभर विविध अवधी-साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का संचालन करते रहते हैं। उनकी रचित पुस्तक “सारंग-कुण्डलिया” हिंदी संस्थान के अनुदान से प्रकाशित हो चुकी है तथा “सारंग-हुंडलिया” शीघ्र प्रकाश्य है। हिंदी दैनिक समाचार पत्र “सन्दौली टाइम्स” में सह-संपादक के रूप में उन्होंने “अवधीनामा” स्तंभ प्रारंभ किया, जो रचनाकारों और पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हुआ। प्रदीप सारंग द्वारा रचित “अवधी वंदन गीत” को विद्वानों द्वारा गणपति वंदना एवं वीणापाणि वंदना की भांति सम्मानजनक स्वीकृति प्राप्त हो रही है। अवधी-वंदन-गीत गाइये अवधी-जग वंदन।। आँगन खेतु सहर या लंदन। गाइये अवधी-जग वंदन।। धनि अवधी जेहिं राम बखानी। धनि उइ-जन जिनि अवधी-बानी।। अवधी-काव्य-कला कुल-नंदन। गाइये अवधी-जग वंदन।। मुल्ला दाऊद से तुलसी तक। सियाराम मय सब नत-मस्तक। अवधी-सुत, संकोच-निकंदन। गाइये अवधी-जग वंदन।। लिखै पढ़ै अवधिन मा गावै। अपनि दूध-भाषा सरसावै।। नेह सना कोटिन अभिनंदन। गाइये अवधी-जग वंदन।। गाइये अवधी-जग वंदन।। आँगन खेतु सहर या लंदन। गाइये अवधी-जग वंदन।।
संकट एवं संवेदनशीलता

आखिर क्यों आवश्यक है यह जन-अभियान?

प्रकृति का संतुलन बनाए रखने वाले हमारे नन्हे जीव, पर्यावरण और ग्रामीण विरासत कंक्रीट के अंधाधुंध विस्तार से संकट में हैं। अवध की माटी से उठती यह एक सामूहिक पुकार है।

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भीषण लू और सूखते जल-स्रोत

मई-जून के प्रचंड ताप में गाँव के पुराने पोखर, ताल-तलैया और कुएँ सूख जाते हैं। पानी की एक बूंद की तलाश में उड़ते हुए दर्जनों परिंदे डिहाइड्रेशन से दम तोड़ देते हैं।

check_circle उपाय: हर छत पर 1 सकोरा पानी = जीवनदान
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पारंपरिक घोंसलों का उजड़ना

कच्चे खपरैल मकानों, छप्परों और पुराने रोशनदानों की जगह पक्के कंक्रीट के मकानों ने ले ली है। घरेलू गौरैया (Sparrow) और बुलबुल के लिए सुरक्षित घर समाप्त हो रहे हैं।

check_circle उपाय: काष्ठ व मिट्टी के सुरक्षित कृत्रिम बसेरे
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खाद्य संकट व कीटनाशकों का दुष्प्रभाव

खेतों में रासायनिक खादों के प्रयोग से कीड़ों और प्राकृतिक बीजों में विषाक्तता बढ़ गई है, जिससे पक्षियों की प्रजनन क्षमता व जीवन-काल पर गहरा आघात पहुंचा है।

check_circle उपाय: प्राकृतिक ज्वार, बाजरा व सत्तू दाना-पात्र
campaign आगामी महा-अभियान

ग्रीष्मकालीन सकोरा एवं पौधा वितरण महा-अभियान 2026

आगामी ग्रीष्म ऋतु में बाराबंकी ज़िले के प्रत्येक न्याय पंचायत तक 5,000 नए सकोरे एवं 500 सुरक्षित घोंसले पहुंचाने का दृढ़ संकल्प। अपने क्षेत्र में वितरण केंद्र स्थापित करने या स्वयंसेवक बनने हेतु आज ही पंजीकरण करें।

calendar_today प्रारंभ: 15 अप्रैल 2026 (विश्व पृथ्वी दिवस से पूर्व)
location_on बाराबंकी, फतेहपुर, रामनगर, देवा, हैदरगढ़
एक मुट्ठी दाना • एक सकोरा पानी

अभियान संकल्प एवं सहयोग पत्र

अपने घर की छत या बालकनी में एक सकोरा पानी और मुट्ठी भर दाना रखने का पवित्र संकल्प लें।

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स्वयंसेवक सहभागिता प्रपत्र (Volunteer Enrollment Form)

माटी का ऋण और सामाजिक उत्तरदायित्व • ग्रीन गैंग स्वयंसेवक दल

edit_note कृपया अपनी सही जानकारी भरें ताकि आपके निकटतम क्षेत्र के ग्रीन गैंग समन्वयक आपसे संपर्क कर सकें।