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अवधी अभियान

अवधी  अभियान

हिंदी एवं अवधी भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के लिए यह अभियान कार्यरत है। साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखा है।

अवध क्षेत्र की बोली भाषा अवधी है। गोस्वामी तुलसीदास ने अवधी भाषा में ही रामचरितमानस की रचना की। “धनि अवधी जेहिं राम बखानी...” अवधी के आदिकवि मुल्ला दाऊद माने जाते हैं, जिन्होंने “चंदायन” जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथ की रचना कर इस भाषा को साहित्यिक गरिमा प्रदान की। उत्तर प्रदेश के जनपद बाराबंकी के ग्राम कमरावां निवासी कवि, पत्रकार एवं सोशल रिसर्चर प्रदीप सारंग जी अवधी भाषा, साहित्य, संस्कृति एवं कला के संरक्षण, संवर्धन और उन्नयन हेतु निरंतर सक्रिय हैं। वे राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त अवधी पुरोधा डॉ. राम बहादुर मिश्रा जी के मार्गदर्शन में वर्षों से कार्य कर रहे हैं। अवधी के लिए समर्पित पंजीकृत संस्था “अवध भारती संस्थान” में डॉ. राम बहादुर मिश्रा संस्थापक अध्यक्ष हैं, जबकि प्रदीप सारंग कार्यकारी सचिव के रूप में महत्वपूर्ण दायित्व निभा रहे हैं। साथ ही वे नेपाल भारत अवधी परिषद के सचिव भी हैं। पिछले 32 वर्षों से निरंतर प्रकाशित हो रही त्रैमासिक पत्रिका “अवध ज्योति” के प्रबंध-संपादक के रूप में भी उनका योगदान उल्लेखनीय है। अपनी मातृभाषा के प्रति समर्पित श्री सारंग वर्षभर विविध अवधी-साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का संचालन करते रहते हैं। उनकी रचित पुस्तक “सारंग-कुण्डलिया” हिंदी संस्थान के अनुदान से प्रकाशित हो चुकी है तथा “सारंग-हुंडलिया” शीघ्र प्रकाश्य है। हिंदी दैनिक समाचार पत्र “सन्दौली टाइम्स” में सह-संपादक के रूप में उन्होंने “अवधीनामा” स्तंभ प्रारंभ किया, जो रचनाकारों और पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हुआ। प्रदीप सारंग द्वारा रचित “अवधी वंदन गीत” को विद्वानों द्वारा गणपति वंदना एवं वीणापाणि वंदना की भांति सम्मानजनक स्वीकृति प्राप्त हो रही है। अवधी-वंदन-गीत गाइये अवधी-जग वंदन।। आँगन खेतु सहर या लंदन। गाइये अवधी-जग वंदन।। धनि अवधी जेहिं राम बखानी। धनि उइ-जन जिनि अवधी-बानी।। अवधी-काव्य-कला कुल-नंदन। गाइये अवधी-जग वंदन।। मुल्ला दाऊद से तुलसी तक। सियाराम मय सब नत-मस्तक। अवधी-सुत, संकोच-निकंदन। गाइये अवधी-जग वंदन।। लिखै पढ़ै अवधिन मा गावै। अपनि दूध-भाषा सरसावै।। नेह सना कोटिन अभिनंदन। गाइये अवधी-जग वंदन।। गाइये अवधी-जग वंदन।। आँगन खेतु सहर या लंदन। गाइये अवधी-जग वंदन।।