गाँव की पगडंडियों से बदलाव की राह — 'ग्रीन गैंग' एवं जनसेवा से जुड़ें
पर्यावरण संवर्धन, पक्षी सकोरा वितरण, अवधी भाषा संरक्षण और ग्रामीण जन-जागरूकता अभियानों में अपनी रुचि और समय के अनुसार निस्वार्थ सहभागिता दर्ज करें।
"हारना सीखा नहीं है, जीत का मैं गीत हूँ।
जुगनुओं का संग है, इंसानियत का मीत हूँ।"
स्वयंसेवक / सदस्यता सहभागिता प्रपत्र
कृपया अपनी सही जानकारी भरें ताकि आपके निकटतम क्षेत्र के ग्रीन गैंग समन्वयक आपसे संपर्क कर सकें।
सदस्यता दो प्रकार की है-
एक बार 500 रुपये जमा करने वाले व्यक्ति को ग्रीन स्वयं सेवक "ग्रीन वॉलंटियर" तथा "हरित स्वयंसेवक" कहा जायेगा।
50 रुपये जमा करके कोई व्यक्ति एक वर्ष के लिए "वालंटियर" तथा "स्वयंसेवक" कहा जायेगा।
जो राह में साथ चले, वही परिवार बने
ग्रीन गैंग और जनसेवा अभियानों से जुड़े स्वयंसेवकों की ज़ुबानी, उनकी प्रेरणा की सच्ची कहानियाँ।
"कॉलेज के बाद रविवार को जब हम सतरिख मार्ग पर रोपे गए पौधों की रखवाली और बाड़ लगाते हैं, तो दिल को गहरा सुकून मिलता है कि हम अपनी धरती के लिए कुछ कर रहे हैं।"
राहुल वर्मा
युवा समन्वयक, कमरावां (बाराबंकी)"सकोरा वितरण अभियान से जुड़ने के बाद मेरी पूरी गली के लोग अब अपनी-अपनी छतों पर पक्षियों के लिए पानी व दाना रखने लगे हैं। नन्हे परिंदों की चहचहाहट ही हमारा पारितोषिक है।"
सुमनलता यादव
परिंदा सहेली, नगर क्षेत्र बाराबंकी"सारंग जी के साथ अवधी चौपालों में जाना और बुजुर्गों के लोक संस्मरणों को सहेजना एक नई चेतना जगाता है। हमारी भाषा ही हमारी अस्मिता है।"
डॉ. अमित अवस्थी
सांस्कृतिक शोधार्थी व भाषा दूतअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
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