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eco ग्रीन मॉर्निंग!
eco जन-सरोकार व पर्यावरण संरक्षण • प्रदीप सारंग की पहल

परिंदा संरक्षण अभियान

“परिंदा संरक्षण अभियान” के तहत पक्षियों के लिए पानी और दाना उपलब्ध कराने तथा उनके संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक किया जाता है।

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"जब भीषण गर्मी में नदियां और तालाब सूख जाते हैं, तब हमारे आंगन और छतों पर रखे मिट्टी के सकोरे ही परिंदों के लिए जीवन बन जाते हैं। यह केवल जलदान नहीं, मानवता का संवेदनशील कर्तव्य है।"

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प्रदीप सारंग संस्थापक, परिंदा व हरियाली अभियान
परिंदा संरक्षण अभियान
सकोरा सेवा • ग्राम सतरिख

ग्रीष्म ऋतु में प्यास से व्याकुल परिंदों को निरंतर अमृत-जल उपलब्ध कराना

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गौरैया बसेरा पारंपरिक काष्ठ घोंसले
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बाल-चेतना टोली स्कूली छात्रों की सेवा
potted_plant निशुल्क वितरण
25,000+ मिट्टी के सकोरे (जल-पात्र)

कुम्हारों से सीधे खरीद कर आमजन व विद्यालयों में वितरित

domain क्षेत्रीय विस्तार
80+ गाँव एवं शिक्षण संस्थान

देवा, सतरिख, हैदरगढ़, रामनगर एवं फतेहपुर ब्लॉक आच्छादित

history_edu अविरल निष्ठा
12+ वर्ष निरंतर ज़मीनी सेवा

प्रत्येक वर्ष 45°C तापमान में विशेष सकोरा अभियान संचालन

volunteer_activism सक्रिय परिवार
5,000+ जागरूक 'परिंदा मित्र'

जो रोज़ सवेरे अपनी छतों व आँगनों में दाना-पानी भरते हैं

menu_book अभियान का विस्तृत विवरण

परिंदा संरक्षण अभियान — विस्तृत विवरण व लक्ष्य

प्रदीप सारंग द्वारा संचालित “परिंदा संरक्षण अभियान” प्रकृति और पक्षियों की रक्षा हेतु एक संवेदनशील पहल है। इस अभियान का उद्देश्य बढ़ती गर्मी, जल की कमी और पर्यावरणीय बदलावों के कारण प्रभावित हो रहे पक्षियों को संरक्षण प्रदान करना है। इस अभियान के अंतर्गत लोगों को अपने घरों, छतों और आसपास के स्थानों पर पक्षियों के लिए पानी के पात्र (परिंडे) रखने, दाना डालने और उनके लिए सुरक्षित वातावरण बनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाकर जैव विविधता को बचाने का संदेश दिया जाता है। यह पहल समाज में करुणा, सह-अस्तित्व और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत बनाती है, जिससे आम लोग भी छोटे-छोटे प्रयासों से बड़े बदलाव का हिस्सा बनते हैं।
संकट एवं संवेदनशीलता

आखिर क्यों आवश्यक है यह जन-अभियान?

प्रकृति का संतुलन बनाए रखने वाले हमारे नन्हे जीव, पर्यावरण और ग्रामीण विरासत कंक्रीट के अंधाधुंध विस्तार से संकट में हैं। अवध की माटी से उठती यह एक सामूहिक पुकार है।

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भीषण लू और सूखते जल-स्रोत

मई-जून के प्रचंड ताप में गाँव के पुराने पोखर, ताल-तलैया और कुएँ सूख जाते हैं। पानी की एक बूंद की तलाश में उड़ते हुए दर्जनों परिंदे डिहाइड्रेशन से दम तोड़ देते हैं।

check_circle उपाय: हर छत पर 1 सकोरा पानी = जीवनदान
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पारंपरिक घोंसलों का उजड़ना

कच्चे खपरैल मकानों, छप्परों और पुराने रोशनदानों की जगह पक्के कंक्रीट के मकानों ने ले ली है। घरेलू गौरैया (Sparrow) और बुलबुल के लिए सुरक्षित घर समाप्त हो रहे हैं।

check_circle उपाय: काष्ठ व मिट्टी के सुरक्षित कृत्रिम बसेरे
agriculture

खाद्य संकट व कीटनाशकों का दुष्प्रभाव

खेतों में रासायनिक खादों के प्रयोग से कीड़ों और प्राकृतिक बीजों में विषाक्तता बढ़ गई है, जिससे पक्षियों की प्रजनन क्षमता व जीवन-काल पर गहरा आघात पहुंचा है।

check_circle उपाय: प्राकृतिक ज्वार, बाजरा व सत्तू दाना-पात्र
campaign आगामी महा-अभियान

ग्रीष्मकालीन सकोरा एवं पौधा वितरण महा-अभियान 2026

आगामी ग्रीष्म ऋतु में बाराबंकी ज़िले के प्रत्येक न्याय पंचायत तक 5,000 नए सकोरे एवं 500 सुरक्षित घोंसले पहुंचाने का दृढ़ संकल्प। अपने क्षेत्र में वितरण केंद्र स्थापित करने या स्वयंसेवक बनने हेतु आज ही पंजीकरण करें।

calendar_today प्रारंभ: 15 अप्रैल 2026 (विश्व पृथ्वी दिवस से पूर्व)
location_on बाराबंकी, फतेहपुर, रामनगर, देवा, हैदरगढ़
एक मुट्ठी दाना • एक सकोरा पानी

अभियान संकल्प एवं सहयोग पत्र

अपने घर की छत या बालकनी में एक सकोरा पानी और मुट्ठी भर दाना रखने का पवित्र संकल्प लें।

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