गौरैया बचाओ अभियान
"छत पर और आँगन में आओ सहेजें गौरैया"
"भीषण गर्मी में जब जलस्रोत सूख जाते हैं, तब हमारी छतों पर रखे मिट्टी के सकोरे ही परिंदों के लिए जीवनदायी सिद्ध होते हैं। थालियों की जूठन और अन्न के दाने नालियों में न बहाकर परिंदों को समर्पित करना ही सच्ची जीव-दया है।"
बेजुबानों की रक्षा, हमारा पावन कर्तव्य
बाराबंकी व आसपास के ग्रामीण अंचलों में नि:शुल्क मिट्टी के सकोरों का वितरण व दाना-पानी संकल्प।
समस्या, पहल और प्रेरणादायी परिणाम
गौरैया बचाओ अभियान के तहत जमीनी स्तर पर किए गए प्रयास और उनके सकारात्मक प्रभाव
जल-अन्न संकट व विलुप्त होती गौरैया
भीषण गर्मी में पानी और भोजन के अभाव में बेजुबान पक्षियों की असमय मृत्यु एवं विलुप्त होती गौरैया का संकट।
10,000+ सकोरे व दाना-पानी संकल्प
प्रदीप सारंग द्वारा हरित स्वयं सेवकों की टीम बनाकर 10,000+ मिट्टी के जल-सकोरों का जनसहयोग से निःशुल्क वितरण एवं घर की छतों पर सुबह शाम थालियों की बची हुई झूठन को नालियों में न फेंककर, छत पर रखना यानी नियमित दाना-पानी व्यवस्था।
हजारों परिंदों को जीवन व करुणा प्रसार
हजारों परिंदों को मिला जीवन और आम जनमानस में बेजुबानों के प्रति करुणा का प्रसार।
आज ही अपने घर की छत पर रखें मिट्टी का सकोरा!
प्रकृति संरक्षण की शुरुआत अपने घर के आँगन और छत से करें। प्रातः व सायं थाली की बची भोजन सामग्री व ताज़ा जल परिंदों के लिए रखें।