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प्रदीप सारंग संस्मरण ग्रंथावली
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प्रदीप सारंग संस्मरण संकलन • अध्याय २ / ७
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अवधी संस्मरण

झरिहख

वर्षा, बचपन और गाँव की चौपाल के सजीव संस्मरण — जब छत पर टपकती बूँदें और टीनसेट पर झमझम आवाज नींद उड़ा देती थी।

account_circle लेखक: प्रदीप सारंग
event 19 May 2026
pin_drop कमरावां, बाराबंकी (उ.प्र.)
schedule 14 min read
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झरिहख
photo_camera आलेख प्रमुख दृश्य • प्रदीप सारंग संग्रह उच्च-रिज़ॉल्यूशन मूल छायाचित्र

आजु जब हम सोय कै जागेन, तौ झमाझम बारिस होत रही। झमाझम मतलब वाकई झम-झम, झम-झम कै आवाज कानन मा सुनाय परत रही। ईका येकु कारन इहौ रहा कि हम घर की छत पर बने सीमेंटेड-टीन सेट के नीचे सोइत है। पानी की बड़ी बड़ी बूँदन के टीनसेट पर गिरै से यही तिना केर, झमझम-झमझम आवाज निकरत रही। आजु कुछ अलग तिना केरी आवाज से कुछ अटपट लाग और जल्दिन खुमारी भागिगै। हमका लाग कि आजु जानौ झरिहख परि जाई।

हमरी घरैतिन रोजै छत पर याक बरतन मा पानी भरि देती हैं अउर राति केर बची बासी चावल, रोटी रखि दियत हैं। जेहिका चुगै मेर-मेर की चिरई अउती हैं। नाश्ता भोजन करती हैं अउर जलपान करती हैं। दाना चुगै मा लगातार चह-चहावा करती हैं।

आजु सबेरेन से बारिस होय रही है। 10 बजि रहा है। अबहीं तक देखे से तौ इहै अनुमान है कि आजु झरिहख परी। पिछले कइव दिनन मा आंशिक-झरिहख जइस मौसम रहा है। हम लोगन के छुटपने मा तीन-तीन दिन के झरिहख परत रहैं। हमका ठीक से यादि है कि चिरइन का दाना चुनै भर का समय नहीं मिलत रहा कि निकरि सकैं।

गाँव से न जुड़े रहै वाले अउर अवधी न बोलै समझै वाले लोगन तईं झरिहख नवा शब्द आही। झरिहख मतलब न पानी बन्द हुवै न बरसबै करै। हल्की हल्की फुहार परा करै। यानी धीमी बारिस होत रहत है। जब ई तिना कै बारिस चारि छः घण्टा होत रहत है तब ई तिना की हल्की बारिस का झरिहख कहा जात है।

झरिहख मा सबका दिक्कत होइन जात है। हमरे छुटपने मा गाँव भर मा दुई चारि घर छोड़ि कै सबके घर कच्चेन हुवत रहे। जब जब झरिहख परत रहा तब तब हर गाँव मा दुई चारि दीवालै जरूर गिरि जाती रहैं। दुई-तीनि दिन के झरिहख मा लोग घर से निकरै न पावैं तब लोग ऊबि जात रहे।

तब गैस चूल्हा केर ईजाद नहीं भवा रहै यहिसे सबके घरन मा खाना चूल्हे पर बनत रहा। झरिहख मा सूखि लकड़ी खतम होइ जाय। अम्मा जब खाना बनाय चुकैं तब चूल्हे कै आगि बाहर निकारि कै रखि दियैं तब हम सब आपनि आपनि कपड़ा सेंकि कै सुखाइत रहै।

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— प्रदीप सारंग

कमरवाँ, सतरिख (बाराबंकी) • संस्मरण संकलन
प्रदीप सारंग संस्मरण डिजिटल ग्रंथावली (संस्करण 2026)
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ग्रंथ अनुक्रमणिका

कुल ७ आलेख व अध्याय
१
पत्रकारिता एवं मीडिया

कैसे बनें पत्रकार, जानें कुछ जरूरी बातें

12 min read
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२
अवधी संस्मरण

झरिहख

14 min read
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३
अवधी लोक-गद्य कथा

सुघरी

10 min read
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४
अवधी काव्य-चिन्तन

सारंग-कुण्डलियाँ व संकल्प-गीत

8 min read
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५
पर्यावरण संरक्षण

ग्रीन गैंग अभियान: 'गुड मॉर्निंग' की जगह 'ग्रीन मॉर्निंग'

11 min read
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६
जीव-दया एवं प्रकृति

परिंदा-संरक्षण: मिट्टी के सकोरे और बेजुबान पक्षियों की प्यास

9 min read
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७
साहित्यिक आलेख

अवधी साहित्य और ग्रामीण पत्रकारिता के चार दशक: एक सिंहावलोकन

15 min read
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प्रदीप सारंग संस्मरण डिजिटल ग्रंथावली (संस्करण 2026)
translate अवधी लोक-शब्दावली मंजूषा (Awadhi Lexicon)

इस संस्मरण में प्रयुक्त ठेठ अवधी शब्दों के अर्थ

बाराबंकी जनपद की बोलचाल से संकलित
झरिहख संज्ञा • Awadhi

अनवरत कई दिनों तक चलने वाली लगातार धीमी फुहार व मूसलाधार बारिश।

घरैतिन संज्ञा • Awadhi

गृहस्वामिनी, घर की मालकिन अथवा धर्मपत्नी के लिए आदरसूचक शब्द।

कनकी संज्ञा • Awadhi

चावल का खंडित टुकड़ा (खंढा), जो पक्षियों को चुगाने के काम आता है।

हरहा गोरु संज्ञा • Awadhi

हल जोतने वाले बैल एवं मवेशी जानवर, जो खूंटे पर बंधे रहते हैं।

सुरा बघ्घी संज्ञा • Awadhi

अवध क्षेत्र का प्रसिद्ध पारंपरिक चौपाल खेल (बकरी और बाघ का खेल)।

ओसारा संज्ञा • Awadhi

मकान के सामने बना बरामदा या छज्जे के नीचे की बैठक जहाँ चौपाल लगती है।

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प्रदीप सारंग

edit_note वरिष्ठ साहित्यकार एवं पर्यावरण कार्यकर्ता location_on ग्राम कमरावां, जिला बाराबंकी, उत्तर प्रदेश, भारत
40+ वर्ष साहित्य सेवा ग्रीन गैंग संस्थापक
लेखक सोशल मीडिया जुड़ें
psychology_alt साहित्यिक व जमीनी सरोकार

विगत चार दशकों से अवधी साहित्य की समृद्ध वाचिक परंपरा के संवर्धन और ग्रामीण पर्यावरण के पुनर्जीवन में संलग्न। हिंदी दैनिक समाचार पत्र सन्दौली टाइम्स के सह-संपादक के रूप में निरंतर पत्रकारिता के सरोकारों को जीने वाले सारंग जी ने बाराबंकी की मिट्टी, तालाबों और वृक्षों के संरक्षण हेतु युवाओं की 'ग्रीन गैंग' का नेतृत्व किया है।

“हारना सीखा नहीं है, जीत का मैं गीत हूँ। जुगनुओं का संग है, इंसानियत का मीत हूँ।”
— प्रदीप सारंग
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साहित्य संचयन

स्वीकृत अवधी कृतियाँ व अन्य आलेख

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कैसे बनें पत्रकार, जानें कुछ जरूरी बातें पत्रकारिता एवं मीडिया
20 May 2026 • 12 min read

कैसे बनें पत्रकार, जानें कुछ जरूरी बातें

भारत में शिक्षा, रोजगार, कृषि, स्वास्थ्य, राजनीति और सामाजिक मुद्दे पत्रकारिता के प्रमुख विषय हैं। पत्रकार समाज तक सटीक और निष्पक्ष जानकारी पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अंशकालिक और पूर्णकालिक पत्रकारों की जिम्मेदारियाँ समान होती हैं, लेकिन सुविधाओं में भिन्नता होती है।

सुघरी अवधी लोक-गद्य कथा
14 May 2026 • 10 min read

सुघरी

मेला जाय की खुशी मा, गोबर की खेप लइकै जाय रही 'सुघरी' के कदमन की चाल आजु अपने आपै कुछ बढ़ी हुई है।

सारंग-कुण्डलियाँ व संकल्प-गीत अवधी काव्य-चिन्तन
02 May 2026 • 8 min read

सारंग-कुण्डलियाँ व संकल्प-गीत

"पेड़, पखेरू, नदियाँ और मनुष्य की अस्मिता" — अवधी के प्राण-छंद कुण्डलियाँ में रचित लोक-चेतना और पर्यावरण के अमर स्वर।

पाठक प्रतिक्रिया व संस्मरण (Comments)

झरिहख एवं अवधी साहित्य पर अपने विचार साझा करें

२ विचार
वि

विनोद कुमार मिश्र

हैदरगढ़, बाराबंकी • 20 May 2026
verified

"सारंग दादा! आपने 'झरिहख' शब्द के साथ पूरे बचपन को आँगन में ला खड़ा किया। वह टीनशेड पर बूँदों का शोर, अम्मा का चूल्हे की बची आग बाहर निकाल कर कपड़े सेंकना... आज सीमेंट के कमरों में वह सोंधी खुशबू और वह अपनापा कहीं खो गया है। अवधी गद्य में ऐसा प्रामाणिक चित्रण विरले ही मिलता है।"

डॉ

डॉ. सुधीर शुक्ला

लखनऊ विश्वविद्यालय • 21 May 2026

"श्रद्धेय डॉ. भगवान वत्स जी के प्रति व्यक्त आदर और राष्ट्रीय सेवा योजना की वह दृष्टि आज भी आपकी जीवनशैली में झलकती है। रात को 1 बजे तक अखबार का संपादन और सुबह पक्षियों का कलरव—यह संस्मरण मात्र एक आलेख नहीं, ग्रामीण जीवन का सांस्कृतिक दस्तावेज है।"

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