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प्रदीप सारंग संस्मरण ग्रंथावली
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प्रदीप सारंग संस्मरण संकलन • अध्याय ८ / १४
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आलेख

छात्रों में उच्च मानवीय मूल्य और रेडक्रास

रेडक्रॉस सिर्फ एक शब्द नहीं है। यह एक वैचारिकी का नाम है। यह उस उच्चतम मानवीय मूल्य का संकेतक है जो कि पीड़ित-मानवता की सेवा का अत्यंत व्यापक संकल्प समेटे एक विशेष सोच-विचार-आचरण को स्वेच्छा से धारण करने की प्रेरणा प्रदान करता है। 

account_circle लेखक: प्रदीप सारंग
event 24 Sep 2026
pin_drop कमरावां, बाराबंकी (उ.प्र.)
schedule 12 min read
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छात्रों में उच्च मानवीय मूल्य और रेडक्रास
photo_camera आलेख प्रमुख दृश्य • प्रदीप सारंग संग्रह उच्च-रिज़ॉल्यूशन मूल छायाचित्र

  रेडक्रॉस सिर्फ एक शब्द नहीं है। यह एक वैचारिकी का नाम है। यह उस उच्चतम मानवीय मूल्य का संकेतक है जो कि पीड़ित-मानवता की सेवा का अत्यंत व्यापक संकल्प समेटे एक विशेष सोच-विचार-आचरण को स्वेच्छा से धारण करने की प्रेरणा प्रदान करता है। 

        लक्ष्यों को पाने हेतु दौड़ते-भागते युग में छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासकों से एक बहुत जरूरी मानवीय-मूल्य छूट जा रहा है और वह है किसी अपरिचित की पीड़ा को गहराई से समझना और आत्मिक अनुभव करना। नियोजकों और नियामकों द्वारा अर्थयुग यानी मशीनयुग की प्राथमिकताओं में इसका कोई औचित्य भी नहीं समझा जा रहा है। अर्थयुग और मशीन युग की पहली विशेषता है कि हर एक, अर्थ उत्पादन के लिए मशीन यानी यंत्रमानव की तरह सक्रिय और संचालित हो। यंत्र मानव में प्राण, विवेक, तथा स्वविवेक नहीं होता है यानी प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष किसी अन्य द्वारा पूर्णतया नियंत्रित होता है। अधिकाधिक अर्थ उत्पादन की चाह ने वर्तमान में मनुष्य को यंत्र मानव बना दिया है। शासन प्रशासन की ऐसी शैली विकसित कर ली गयी है जहाँ स्वविवेक का प्रयोग सिर्फ कुछ प्रतिशत बचा हुआ है। संवेदनाओं को मार लेना अथवा मार देना ही कुशल प्रशासक तथा उत्कृष्ट नियामक का प्रथम गुण निर्धारित किया गया है।

           अन्य देशों की तुलना करते हुए भारत भी तेजी से यंत्र मानव की ओर बहुत तेजी से बढ़ चला है। जबकि भारतीयता के संदर्भ में मानवीय संवेदना पहला गुण है। भारतीय संदर्भ में किसी भी व्यवस्था के संचालक नियामक नियोजक को मनुष्य होने की शर्त को तो अनिवार्यतः पूरी ही करनी चाहिए। यंत्रमानव और मनुष्य दोनों परस्पर विरोधी वैचारिकी हैं। एक सिर्फ प्रबंधन और व्यवस्थापन को शीर्ष पर रखती है तो दूसरी मानवता को शीर्ष पर। लंबे समय की दृष्टि से दोनों हानिकारक हैं। दोनों का समानुपातिक तालमेल आवश्यक है। हम कह सकते हैं कि यंत्रमानव बनते जा रहे युग में रेडक्रॉस मानवता को बचाये रखने की वैचारिकी है।           

        भारत में संसदीय अधिनियम-1920 पारित हुआ और इसी के तहत भारत में भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी का गठन हुआ था। विशेष ध्यान देने की आवश्यकता यह है कि भारत का प्रत्येक छात्र जूनियर रेडक्रॉस का सदस्य होता है। क्योंकि वह शुल्क जमा करता है। निःशुल्क शिक्षा की संकल्पना में जूनियर छात्रों से शुल्क नहीं लिया जाता है किंतु हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में अभी भी शुल्क जमा कराया जाता है। शुल्क दे रहा हो या न दे रहा हो भारतीय विद्यालय में पढ़ने वाला प्रत्येक छात्र जूनियर रेडक्रॉस का स्वयमेव सदस्य है। दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि शिक्षाविदों की दूरदर्शिता के परिणाम स्वरूप आज भी छात्रों में विश्व मानव की संकल्पना जगाने तथा मानवता की सेवा का पाठ सिखाने का श्रेष्ठ तरीका रेडक्रॉस है। जरूरत है कि छात्रों को रेडक्रॉस की गतिविधियों में शामिल रखा जाए। मैथिली शरण गुप्त जी द्वारा लिखित अग्रेतर पंक्तियाँ रेडक्रॉस के भाव को प्रकट करने हेतु सक्षम हैं- मनुष्य है वही कि जो मनुष्य के लिए मरे। छात्रों के दिल दिमाग में सेवा भाव का उच्च मानवीय मूल्य तथा वैश्विक मानव का परिदृश्य स्थापित करने हेतु रेडक्रॉस की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

         रेडक्रॉस एक विश्व स्तरीय, गैर सरकारी संगठन है। जिसकी स्थापना वर्ष 1863 में स्विट्जरलैंड में हुई थी। रेडक्रॉस ने प्रथम विश्‍व युद्ध और द्वतीय विश्‍व युद्ध में अपनी अहम भूमिका निभाते हुऐ घायल सैनिकों और नागरिकों की सहायता की थी। रेडक्रॉस के इन्‍हीं कार्यों की बदौलत वर्ष 1917 में इस संंस्‍था को नोबेल शांति पुरस्‍कार से नवाजा गया था। वर्तमान समय में लगभग 186 देशों में रेड क्रॉस संस्‍था अपना कार्य कर रही है। वर्तमान में रूस यूक्रेन युद्ध के दौरान भी रेडक्रॉस अपना कार्य कर रही है। विश्व रेडक्रॉस का मुख्य कार्यालय स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर में है।

               वर्तमान में विश्व के लगभग सभी देशों में इसकी शाखाएं संचालित हैं और यह मानव सेवा करने का काम सभी देशों में कर रही है। संस्था के सदस्य निस्वार्थ भाव से मानव सेवा का काम करते हैं। किसी भी प्राकृतिक/ मानवीय त्रासद काल में रोगियों घायलों सैनिकों की मदद करते हैं।

           किसी भी आपदकाल में बिना भेदभाव, पीड़ित मानवता की सेवा करते हुए आज सम्पूर्ण विश्व में रेडक्रॉस मानवता का पर्याय बन गयी है। युद्धकाल में घायल सैनिकों की चिकित्सीय सेवा सहायता करना,  शांति काल में मानव जीवन एवं स्वास्थ्य की रक्षा विषयक जागरूकता-कार्य रेडक्रॉस का प्रमुख उद्देश्य है। निःस्वार्थ भाव से सेवा सहायता को तत्पर रेडक्रॉस स्वयं सेवकों का प्रशिक्षण रेडक्रॉस की महत्वपूर्ण गतिविधि है।

               महान पुरुष जीन हेनरी डयूना का जन्म 8 मई 1828 में हुआ था। उनके महान कार्यों को देखते हुए हेनरी ड्यूना के जन्म दिन 08 मई को विश्व रेडक्रॉस दिवस के रूप में मनाया जाता है। इन्होंने मानवीय सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया और पूरे विश्व के लोगों को मानवतावादी सेवक के रूप में स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। सेवा कार्य के लिए उनके द्वारा गठित सोसायटी को रेडक्रॉस का नाम दिया गया। वर्ष 1901 में हेनरी डयूना को उनके मानव सेवा के कार्यों हेतु पहला नोबेल शांति पुरस्कार मिला। सेल्फिरेनो के युद्ध में घायल सैनिकों की स्थिति देख विचलित हेनरी डयूना  ने 9 फरवरी 1863 को जेनेवा में पांच लोगों की एक कमेटी बनाई। हेनरी की इस परिकल्पना का नाम था 'इंटरनेशनल कमेटी फॉर रिलीफ टू द वाउंडेड'। यही परिकल्पना आगे चलकर रेडक्रॉस के रूप में सामने आई।

          रेडक्रॉस की स्थापना से पूर्व युद्ध के दौरान घायल सैनिक युद्ध भूमि में तड़प तड़प कर भूखे प्यासे इलाज के अभाव में मर जाया करते थे। जिस देश की भूमि पर युद्ध होते थे उस देश के चिकित्सा कर्मी व प्रशासन शत्रु देश के सैनिकों को वहीं पड़ा रहने देती थी अपने देश के सैनिकों को उठाकर इलाज करते रहे थे। हेनरी ड्यूना ने कहा कि सैनिक तो आदेश का पालन करके युद्ध लड़ते हैं उन्हें शत्रु और मित्र के वर्गीकरण में न लाया जाय। किसी मनुष्य को तड़प तड़प कर आखिर कैसे मरने दिया जा सकता है। और इस प्रकार हेनरी ड्यूना की पहल पर जोरदार वकालत पर सम्पूर्ण विश्व ने इस तर्क को स्वीकार किया। इसीलिए युद्ध काल में रेडक्रॉस स्वयं सेवक को कोई (शत्रु-मित्र)  सेना न ही गिरफ्तार कर सकती है और न ही गोली मार सकती है। घायल चाहे जिस देश का हो रेडक्रॉस उसका इलाज करती है। गिरफ्तार घायलों का भी इलाज रेडक्रॉस करती है।

               इसीप्रकार दुनियाँ भर की जेलों में बंद कैदियों के पास परिजनों के पत्र नहीं जाते थे। रेडक्रॉस की पहल पर ही कैदियों तक परिजनों के पत्र आने जाने लगे। मानवीय दृष्टिकोण से रेडक्रॉस ने तर्को के द्वारा सरकारों को प्रेरित कर सहमत कर अनेक उच्च मानवीय आदर्श परक कानून बनवाये। रोगियों को लाने ले जाने वाली एम्बुलेंस की परिकल्पना भी रेडक्रॉस की देन है। रेडक्रॉस को ठीक से जानने समझने के लिए सात मौलिक सिद्धांतो को जानना समझना बहुत जरूरी है जो निम्नवत हैं-

 1- मानवता:-

            यह सिद्धांत मानव के प्रति सम्मान पर आधारित है, शांति के विचार से अविभाज्य है, और आंदोलन के आदर्श को सारांशित करता है। इसलिए अन्य मौलिक सिद्धांत इसी से प्राप्त होते हैं।

            मानवता का अर्थ है दूसरों की पीड़ा को समझना और साझा करना, और इसे रोकना और कम करना। इसका उद्देश्य जीवन को हिंसा से बचाना है। यह युद्ध को रोकने और समाप्त करने की दिशा में पहला कदम है, और सच्ची शांति का एक अनिवार्य कारक है, जो न तो वर्चस्व से और न ही सैन्य श्रेष्ठता से प्राप्त किया जा सकता है। यह आपसी समझ, दोस्ती, सहयोग और स्थायी शांति के लिए सभी लोगों के बीच बढ़ावा देता है।

2- निष्पक्षता:-

           रेडक्रॉस राष्ट्रीयता, जाति, धार्मिक मान्यताओं, वर्ग या राजनीतिक विचारों में कोई भेदभाव नहीं करता।बिना किसी भेदभाव के यह व्यक्ति की पीड़ा को दूर करने के लिए प्रयास करता है, केवल उनकी जरूरतों के द्वारा निर्देशित करने के लिए, और संकट के सबसे जरूरी मामलों को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करता है।

          बिना किसी भेदभाव के राहत का एक सकारात्मक सिद्धांत जो इस बात की पुष्टि करता है कि संकट में मनुष्य समान हैं। इसलिए यह श्रेष्ठता की भावनाओं और भेदभावपूर्ण कार्रवाई के विपरीत है जो कई संघर्षों का कारण है। अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून में, निष्पक्षता का अर्थ है एक सशस्त्र संघर्ष में जुझारू लोगों के प्रति एक तटस्थ राज्य द्वारा पालन किया जाने वाला आचरण।

3- तटस्थता:-

         सभी के विश्वास का आनंद जारी रखने के लिए, रेडक्रॉस युद्ध में पक्ष नहीं ले सकता या एक राजनीतिक, जातीय, धार्मिक या वैचारिक प्रकृति के विवादों में किसी भी समय अपने को संलग्न नहीं कर सकता। दूसरे शब्दों में दुनियाँ भर के सदस्यों नागरिकों का विश्वास बनाए रखने के लिए, रेडक्रॉस किसी प्रकार की शत्रुता में भाग लेने से परहेज करता है और हर समय राजनीतिक, नस्लीय, धार्मिक या दार्शनिक प्रकृति के विवादों में भाग लेने से परहेज करता है। रेडक्रॉस तटस्थता को एक साधन मानता है, साध्य नहीं। तटस्थता का अर्थ या तो पीड़ा या युद्ध की स्वीकृति के प्रति उदासीनता नहीं है, बल्कि रेड क्रॉस द्वारा प्रभावी मानवीय कार्रवाई की अनिवार्य शर्त है।

4- स्वतंत्रता:-

रेडक्रॉस का यह आंदोलन स्वतंत्र है। राष्ट्रीय समाज, जबकि उनकी सरकारों के मानवीय सेवाओं और अपने-अपने देशों के कानूनों के अधीन में सहायक है, हमेशा उनकी स्वायत्तता को बनाए रखना चाहिए, ताकि वे हर समय आंदोलन के सिद्धांतों के अनुसार कार्य करने में सक्षम हो सकें।

5- स्वैच्छिक सेवा:-

यह एक स्वयंसेवी राहत आंदोलन है किसी भी तरीके से लाभ के लिए इच्छा से प्रेरित नहीं है।

6- एकता:-

एक देश में सिर्फ एक ही रेड क्रॉस समाज हो सकता है। यह सबके लिए खुला होना चाहिए। इसे अपने क्षेत्र भर में अपने मानवीय कार्य को जारी रखना चाहिए।

7- सार्वभौमिकता:-

अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस आंदोलन, जिसमें सभी समाजों को बराबर का दर्जा दिया है और बराबर जिम्मेदारियां हैं और एक दूसरे की मदद करने में कर्तव्यों का हिस्सा है।

            उपरोक्त सात सिद्धांतों को स्वीकार करने वाला कोई भी स्वेच्छा से रेडक्रॉस की सदस्यता लेकर रेडक्रॉस आंदोलन को आगे बढ़ाने में अपनी सेवाओं के द्वारा पीड़ित व दुखी मानवता को राहत पहुँचाने में योगदान दे सकता है।

            विश्व के किसी कोने में जब कहीं मानवता पीड़ित दिखती है तो रेडक्रॉस भी पीड़ित मानवता को राहत पहुंचाने हेतु अपना कार्य करने में संलग्न दिखती है। आज रेडक्रॉस मानवता का पर्याय बनकर नित नए आदर्श बना रही है और इसके स्वयं सेवक बिना किसी भेदभाव निःस्वार्थ रूप से सेवा कार्य करते दिखते हैं। हम कह सकते है कि सेवा भाव से मानवीय पीड़ा को कम करने, समाप्त करने, पीड़ा उत्पन्न न होने  देने के उपाय करना ही रेडक्रॉस के कार्य हैं।

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— प्रदीप सारंग

कमरवाँ, सतरिख (बाराबंकी) • संस्मरण संकलन
प्रदीप सारंग संस्मरण डिजिटल ग्रंथावली (संस्करण 2026)
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ग्रंथ अनुक्रमणिका

कुल १४ आलेख व अध्याय
१
आलेख

कुछ अच्छे लोग

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२
अवधी गद्य

अवधी किहानी, सुघरी -2

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३
अवधी गद्य

झरिहख

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४
हिंदी पद्य

दोहे- "नारी"

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५
आलेख

नेग की जबरन वसूली नहीं कर सकेंगे किन्नर-हाईकोर्ट

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६
आलेख

मैं फेल हुआ या पास....?

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७
आलेख

विचलन बनाम छतिपूर्ति

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८
आलेख

छात्रों में उच्च मानवीय मूल्य और रेडक्रास

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९
आलेख

एक जरुरी गहन चिन्तन, भारत और भारतीयता

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१०
आलेख

नृत्य द्वारा उठाया जाता है - देवी-देवताओं के वाहन से जुड़े रहस्य से पर्दा

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११
आलेख

कैसे बनें पत्रकार, जानें कुछ जरूरी बातें

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१२
आलेख

भूख, भोजन, भीख और भ्रष्टाचार

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१३
आलेख

स्त्री बनाम पुरूष

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१४
अवधी गद्य

सुघरी

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प्रदीप सारंग संस्मरण डिजिटल ग्रंथावली (संस्करण 2026)
translate अवधी लोक-शब्दावली मंजूषा (Awadhi Lexicon)

इस संस्मरण में प्रयुक्त ठेठ अवधी शब्दों के अर्थ

बाराबंकी जनपद की बोलचाल से संकलित
झरिहख संज्ञा • Awadhi

अनवरत कई दिनों तक चलने वाली लगातार धीमी फुहार व मूसलाधार बारिश।

घरैतिन संज्ञा • Awadhi

गृहस्वामिनी, घर की मालकिन अथवा धर्मपत्नी के लिए आदरसूचक शब्द।

कनकी संज्ञा • Awadhi

चावल का खंडित टुकड़ा (खंढा), जो पक्षियों को चुगाने के काम आता है।

हरहा गोरु संज्ञा • Awadhi

हल जोतने वाले बैल एवं मवेशी जानवर, जो खूंटे पर बंधे रहते हैं।

सुरा बघ्घी संज्ञा • Awadhi

अवध क्षेत्र का प्रसिद्ध पारंपरिक चौपाल खेल (बकरी और बाघ का खेल)।

ओसारा संज्ञा • Awadhi

मकान के सामने बना बरामदा या छज्जे के नीचे की बैठक जहाँ चौपाल लगती है।

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श्री प्रदीप सारंग

edit_note वरिष्ठ साहित्यकार एवं पर्यावरण कार्यकर्ता location_on ग्राम कमरावां, जिला बाराबंकी, उत्तर प्रदेश, भारत
40+ वर्ष साहित्य सेवा ग्रीन गैंग संस्थापक
लेखक सोशल मीडिया जुड़ें
psychology_alt साहित्यिक व जमीनी सरोकार

विगत चार दशकों से अवधी साहित्य की समृद्ध वाचिक परंपरा के संवर्धन और ग्रामीण पर्यावरण के पुनर्जीवन में संलग्न। हिंदी दैनिक समाचार पत्र सन्दौली टाइम्स के सह-संपादक के रूप में निरंतर पत्रकारिता के सरोकारों को जीने वाले सारंग जी ने बाराबंकी की मिट्टी, तालाबों और वृक्षों के संरक्षण हेतु युवाओं की 'ग्रीन गैंग' का नेतृत्व किया है।

“हारना सीखा नहीं है, जीत का मैं गीत हूँ। जुगनुओं का संग है, इंसानियत का मीत हूँ।”
— श्री प्रदीप सारंग
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इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार, अनुभव और विश्लेषण पूर्णतः लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। वेबसाइट एवं संपादकीय मंडल आलेख में व्यक्त निजी दृष्टिकोण की स्वतंत्रता का सम्मान करता है। विस्तृत कानूनी शर्तों व नीतियों के लिए कृपया हमारी अस्वीकरण नीति (Disclaimer) एवं संपादकीय नीति (Editorial Policy) देखें।

साहित्य संचयन

स्वीकृत अवधी कृतियाँ व अन्य आलेख

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कुछ अच्छे लोग आलेख
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कुछ अच्छे लोग

संस्मरण मेरठ यात्रा

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20 Oct 2026 • 8 min read

अवधी किहानी, सुघरी -2

अवधी किहानी - सुघरी 2

झरिहख अवधी गद्य
18 Oct 2026 • 8 min read

झरिहख

आजु जब हम सोय कै जागेन, तौ झमाझम बारिस होत रही। झमाझम मतलब वाकई झम-झम, झम-झम कै आवाज कानन मा सुनाय परत रही।

पाठक प्रतिक्रिया व संस्मरण (Comments)

छात्रों में उच्च मानवीय मूल्य और रेडक्रास एवं अवधी साहित्य पर अपने विचार साझा करें

२ विचार
वि

विनोद कुमार मिश्र

हैदरगढ़, बाराबंकी • 20 May 2026
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"सारंग दादा! आपने 'झरिहख' शब्द के साथ पूरे बचपन को आँगन में ला खड़ा किया। वह टीनशेड पर बूँदों का शोर, अम्मा का चूल्हे की बची आग बाहर निकाल कर कपड़े सेंकना... आज सीमेंट के कमरों में वह सोंधी खुशबू और वह अपनापा कहीं खो गया है। अवधी गद्य में ऐसा प्रामाणिक चित्रण विरले ही मिलता है।"

डॉ

डॉ. सुधीर शुक्ला

लखनऊ विश्वविद्यालय • 21 May 2026

"श्रद्धेय डॉ. भगवान वत्स जी के प्रति व्यक्त आदर और राष्ट्रीय सेवा योजना की वह दृष्टि आज भी आपकी जीवनशैली में झलकती है। रात को 1 बजे तक अखबार का संपादन और सुबह पक्षियों का कलरव—यह संस्मरण मात्र एक आलेख नहीं, ग्रामीण जीवन का सांस्कृतिक दस्तावेज है।"

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