मुख्य सामग्री पर जाएं
eco ग्रीन मॉर्निंग!
३ / ९
|
प्रदीप सारंग संस्मरण ग्रंथावली
३ / ९
chevron_left
chevron_right
प्रदीप सारंग संस्मरण संकलन • अध्याय ३ / ९
menu_book अध्याय ३
आलेख

एक जरुरी गहन चिन्तन, भारत और भारतीयता

विदेशी' कहकर वैलेंटाइन डे का विरोध करना खोखला तर्क है, क्योंकि हम विज्ञान, तकनीक और संविधान तक में वैश्विक विचारों को अपना चुके हैं। असली भारतीयता दिखावटी राष्ट्रवाद या संकीर्णता में नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अपने आचरण व सोच को सुधारने में निहित है।

account_circle लेखक: प्रदीप सारंग
event 16 Sep 2026
pin_drop कमरावां, बाराबंकी (उ.प्र.)
schedule 12 min read
spa
एक जरुरी गहन चिन्तन, भारत और भारतीयता
photo_camera आलेख प्रमुख दृश्य • श्री प्रदीप सारंग संग्रह उच्च-रिज़ॉल्यूशन मूल छायाचित्र

 "वेलेंटाइन डे भारतीय नहीं है इसलिए न मनाएं" ऐसी आवाजें आने लगती हैं वेलेंटाइन डे से पहले। इसके साथ कुछ बकवास भी परोसते रहते हैं लोग। विदेशों (जेनेवा, अमेरिका, लंदन) में बैठकर तय किये गए अनेक दिवस मनाने के लिए भारत सरकार बजट खर्च करती है। और कुछ लोग सिर्फ भारतीयता की कोरी बकवास को ढोते रहते में ही गौरव महसूस करते हैं। ये मानक ही निराधार है और ये बात हवा हवाई है कि अमुक चीज भारतीय नही है तो भारतीय ध्यान न दें, उसको अपनाएं न। अरे भाई पोलियो दवा भारत ने बनाई है क्या ? ये मोबाइल व पार्ट्स भारत बना रहा है क्या ? अमित्र देश से लड़ने के लिए हथियार विदेशों से खरीद रहे हैं ? विदेशी कपड़े व खिलौने भारतीय बाजारों की शोभा हैं। विदेशी व्यंजनों को बड़े ही चाव से खाया जा रहा है...आदि आदि।


क्या समझ रहे हैं भारतीय युवाओं और छात्रों को ऐसी सलाह देने वाले लोग ? दूसरों के चिंतन की साजिश के शिकार ऐसे लोग खुद चिन्तन नहीं करते हैं और विद्वान की तरह उपदेशक हो जाते हैं। सोशल मीडिया पर तो इधर उधर से लेकर परोसने की आदत आम हो गई है। अपनी रसोई में पकाकर परोसो तो स्वाद ही अलग है। 


पुलवामा शहीदों को नमन करें और वेलेंटाइन डे का बहिष्कार। ऐसा खूब प्रचारित होता है। ऐसा कहने वाले लोग एक बात अपने जहन में साफ करें  कि वेलेंटाइन डे मनाने पर आपत्ति है या पुलवामा शहीदों को नमन जरूरी है ?


वेलेंटाइन डे न मनाएं अच्छी बात है। मनाएं तो भी कुछ बुरा नहीं है। किंतु भारतीय नहीं है इसलिए न मनाएं ये तर्क देना बकवास है और कुछ नहीं। लोगों को तंगदिल न बनाया जाए। भारत का संविधान बन रहा था तो भी विदेशी संविधान से परहेज नहीं किया गया। अनेक तत्व गैर भारतीय संविधान से लिये गए हैं। इसलिए कि भारतीय परम्पराओं व संस्कृति में आधुनिक विकास के लिए जरूरी तत्व थे ही नहीं इसलिए गैर भारतीय दर्शन को स्थान देना पड़ा। भाषा विकास के सिद्धांत भी विदेशी शब्दों से परहेज नहीं करते हैं। किन्तु कुछ लोग आए दिन भारतीय न होने के कारण मनाने को लेकर बकवास परोसते रहते हैं। जब किसी को भी अपने घर परिवार धर्म संस्कृति परम्परा, प्रान्त/देश की सीमाओं के भीतर मनवांछित नहीं मिलेगा तब तब लोग इन सीमाओं के बाहर जाएंगे। चाहे स्वाद का मामला हो, या मनोरंजन का, चाहे वस्तु उपयोग का मामला हो या तकनीक प्रयोग का। 


दीवाली में जुआ होने लगा है तो दीवाली न मनाई जाए या जुआ न हो,,,, किस बात पर फोकस किया जाय....? होली में दारू पी जाने लगी है हुड़दंग होने लगे हैं तो होली न मनायें या दारू न पीने हुड़दंग न करने पर फोकस किया जाना चाहिए ?


अरे भाई दिमाग को भी कभी कभी साफ करना चाहिये, जहनियत को भी। पर कुछ लोग हैं कि जब देखो भारतीय भारतीय की रट से ही भारतीय होने का गर्व महसूस करते हैं। भारतीय होने का अर्थ होता है भारत के संविधान का सर्वोच्च स्वीकार। पर बहुत कम लोग हैं जो संविधान की मर्यादा और संविधान का व्यवहार में पालन करने को प्राथमिकता देते हैं अन्यथा बहुधा लोग अपनी पसंदगी व अपनी मनमानी के आगे भारतीय संविधान को छोटा और कमतर मानते हैं। ये नंगा सच है और ऐसा नंगा सच उघारने वाला राष्ट्र और संस्कृति का दुश्मन भी घोषित किया जा सकता है..? क्योंकि ये तो मैं (प्रदीप सारंग) खुद ही स्वीकार कर रहा हूँ कि  बहुधा लोग अपनी मनमानी और पसन्दगी के लिए खुल्लमखुल्ला संविधान का उल्लंघन करते पाए जा रहे हैं। तब भारतीयता कहाँ रहती है...? जो भारत के कानून का पालन अपने जीवन मे नहीं कर रहे हैं वे भारतीयता के नाम पर कुछ भी बोलने के अधिकारी नहीं हैं फिर भी बेशर्मी पूर्वक बकवास परोसते रहते हैं। भारत के संविधान में लिखित कानून का उल्लंघन करने वालों की आबादी कम नहीं है। इसी देश के लोग हैं और भारतीयता की कोरी बकवास करने वाले लोग सड़कों पर बिना हेलमेट, बिना सीटबेल्ट के निकलते हैं। क्यों क्योंकि इनकी पसन्दगी और मनमानी के आगे कानून गौण है। ऐसे ही मुद्दों पर भारतीयता की दुहाई देने वाले व्यवसायी टैक्सचोरी में भरपूर दिमाग लगाकर कानून से आँख मिचौली खेलते हैं, ऑफिसों में बैठकर घूस वसूली करते हैं, सड़कों और होटलों में छिछोरापन दिखाते हैं ऐसा करने वाले भारत के ही हैं। जिस तरह के वस्त्र आज की महिलाएं पहनने को उतावली हैं कोई रोक ले अपने घरों में। मुझे  निजी तौर से प्रदर्शन संस्कृति से कोई आपत्ति नहीं। इसलिए कि आचरण पर फोकस करना है न कि पहनावे पर।  कुछ सवाल और भी हैं जुए में द्रोपदी को दाँव पर लगाने की सोंच व सीता अपहरण जैसी सोंच क्यों पैदा हुई ? अग्नि परीक्षा की आवश्यकता क्यों पड़ी ? सती प्रथा का शुभारम्भ क्यों हुआ था ? गर्भ में बच्चियों को मार देने की सोंच क्यों उत्पन्न हुई ? इन सबके पीछे भारतीय संस्कृति सोंच और परम्परा के ही तत्व रहे हैं न। पुरातन से चले आ रहे लिंग आधारित भेद वाली सोंच ने ऐसी अनेक प्रथाओं को जन्म दिया है। आज इसी लिंग आधारित विभेदकारी सोंच को समाप्त करने की जरूरत है न कि बढ़ाने की। एक सबसे महत्वपूर्ण  सवाल ये है कि रात के अँधेरे में सड़क पर चलते हुए एक अकेली महिला के मन में अधिक डर किससे रहता है किसी जानवर से या जानवरी प्रवृत्ति वाले मनुष्य से ? भारतीयता की बात करने वाले महान पुरुषों, इस सवालों के जवाब में क्या बोलोगे ? फोकस आचरण पर करना होगा ? बकबक पर नहीं। लिंग आधारित विभेदकारी सोंच समाप्त किये बिना आचरण में परिवर्तन संभव नहीं। आचरण बदलना है तो भेदकारी सोंच बदलो। भारत का कानून लिव इन रिलेशन को मान्यता देता है। यानी सहमति के आधार पर किन्ही दो वयस्क महिला और पुरुष को एक साथ आने जाने, बातें करने, एक साथ रहने को भी गैरक़ानूनी नहीं मानता है तो लोग वेलेंटाइन डे पर हो हल्ला क्यों मचाते हैं ? जिन्हें ये सब  पसंद नहीं वे ऐसे कानून के खिलाफ हो हल्ला मचाएं न कि वेलेंटाइन के खिलाफ। वेलेंटाइन एक दिन का है पर कानून ने हर रोज ऐसे आचरण को मान्यता प्रदान की हुई है।


auto_stories

— प्रदीप सारंग

कमरवाँ, सतरिख (बाराबंकी) • संस्मरण संकलन
प्रदीप सारंग संस्मरण डिजिटल ग्रंथावली (संस्करण 2026)
३ / ९
auto_stories

ग्रंथ अनुक्रमणिका

कुल ९ आलेख व अध्याय
आलेख

स्त्री बनाम पुरूष

10 min read
chevron_right
आलेख

नृत्य द्वारा उठाया जाता है - देवी-देवताओं के वाहन से जुड़े रहस्य से पर्दा

10 min read
chevron_right
आलेख

एक जरुरी गहन चिन्तन, भारत और भारतीयता

10 min read
chevron_right
आलेख

भूख, भोजन, भीख और भ्रष्टाचार

10 min read
chevron_right
आलेख

कैसे बनें पत्रकार, जानें कुछ जरूरी बातें

10 min read
chevron_right
आलेख

छात्रों में उच्च मानवीय मूल्य और रेडक्रास

10 min read
chevron_right
हिंदी पद्य

नेग की जबरन वसूली नहीं कर सकेंगे किन्नर-हाईकोर्ट

10 min read
chevron_right
अवधी गद्य

सुघरी

10 min read
chevron_right
साक्षात्कार

झरिहख

10 min read
chevron_right
प्रदीप सारंग संस्मरण डिजिटल ग्रंथावली (संस्करण 2026)
translate अवधी लोक-शब्दावली मंजूषा (Awadhi Lexicon)

इस संस्मरण में प्रयुक्त ठेठ अवधी शब्दों के अर्थ

बाराबंकी जनपद की बोलचाल से संकलित
झरिहख संज्ञा • Awadhi

अनवरत कई दिनों तक चलने वाली लगातार धीमी फुहार व मूसलाधार बारिश।

घरैतिन संज्ञा • Awadhi

गृहस्वामिनी, घर की मालकिन अथवा धर्मपत्नी के लिए आदरसूचक शब्द।

कनकी संज्ञा • Awadhi

चावल का खंडित टुकड़ा (खंढा), जो पक्षियों को चुगाने के काम आता है।

हरहा गोरु संज्ञा • Awadhi

हल जोतने वाले बैल एवं मवेशी जानवर, जो खूंटे पर बंधे रहते हैं।

सुरा बघ्घी संज्ञा • Awadhi

अवध क्षेत्र का प्रसिद्ध पारंपरिक चौपाल खेल (बकरी और बाघ का खेल)।

ओसारा संज्ञा • Awadhi

मकान के सामने बना बरामदा या छज्जे के नीचे की बैठक जहाँ चौपाल लगती है।

share

इस संस्मरण को साझा करें

अवधी भाषा और ग्रामीण जीवन के यथार्थ को जन-जन तक पहुँचाएँ

WhatsApp Facebook Twitter/X LinkedIn

श्री प्रदीप सारंग

edit_note वरिष्ठ साहित्यकार एवं पर्यावरण कार्यकर्ता location_on ग्राम कमरावां, जिला बाराबंकी, उत्तर प्रदेश, भारत
40+ वर्ष साहित्य सेवा ग्रीन गैंग संस्थापक
लेखक सोशल मीडिया जुड़ें
psychology_alt साहित्यिक व जमीनी सरोकार

विगत चार दशकों से अवधी साहित्य की समृद्ध वाचिक परंपरा के संवर्धन और ग्रामीण पर्यावरण के पुनर्जीवन में संलग्न। हिंदी दैनिक समाचार पत्र सन्दौली टाइम्स के सह-संपादक के रूप में निरंतर पत्रकारिता के सरोकारों को जीने वाले सारंग जी ने बाराबंकी की मिट्टी, तालाबों और वृक्षों के संरक्षण हेतु युवाओं की 'ग्रीन गैंग' का नेतृत्व किया है।

format_quote
“हारना सीखा नहीं है, जीत का मैं गीत हूँ। जुगनुओं का संग है, इंसानियत का मीत हूँ।”
— श्री प्रदीप सारंग
gavel

लेखक विचार अस्वीकरण (Editorial & Author Disclaimer)

इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार, अनुभव और विश्लेषण पूर्णतः लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। वेबसाइट एवं संपादकीय मंडल आलेख में व्यक्त निजी दृष्टिकोण की स्वतंत्रता का सम्मान करता है। विस्तृत कानूनी शर्तों व नीतियों के लिए कृपया हमारी अस्वीकरण नीति (Disclaimer) एवं संपादकीय नीति (Editorial Policy) देखें।

साहित्य संचयन

स्वीकृत अवधी कृतियाँ व अन्य आलेख

सभी स्वीकृत आलेख देखें arrow_forward
स्त्री बनाम पुरूष आलेख
16 Sep 2026 • 8 min read

स्त्री बनाम पुरूष

स्त्री अउर पुरुष मा न कोऊ कमतर है, न कोऊ श्रेष्ठतर, न कोऊ वृहत्तर अथवा गुरुतर। दुनहूँ केर अपन अलग-अलग अस्तित्व है, अलग-अ...

नृत्य  द्वारा उठाया  जाता है - देवी-देवताओं के वाहन से जुड़े रहस्य से पर्दा आलेख
16 Sep 2026 • 8 min read

नृत्य द्वारा उठाया जाता है - देवी-देवताओं के वाहन से जुड़े रहस्य से पर्दा

भारतीय पौराणिक कथाओं में पशु-पक्षियों के वाहनों को देवी-देवताओं के विशेष गुणों और ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं के प्रतीक रूप में दर्शाया गया है। हमारी पारंपरिक नृत्य और कला शैलियां इन दैवीय गुणों, मुद्राओं और प्रकृति के प्रति सम्मान को अभिव्यक्ति देकर समाज को आध्यात्मिक चेतना से जोड़ती हैं।

भूख, भोजन, भीख और भ्रष्टाचार आलेख
16 Sep 2026 • 8 min read

भूख, भोजन, भीख और भ्रष्टाचार

  व्याकरण की दृष्टि से 'भूख' सिर्फ स्थिति-सूचक संज्ञा है, जबकि जीवन के लिए 'भूख' अपरिहार्य स्थिति है। भूख और भोजन एक सिक्के के दो पहलू हैं। जीवन के लिए दोनों की महत्ता बराबर है।

पाठक प्रतिक्रिया व संस्मरण (Comments)

एक जरुरी गहन चिन्तन, भारत और भारतीयता एवं अवधी साहित्य पर अपने विचार साझा करें

२ विचार
वि

विनोद कुमार मिश्र

हैदरगढ़, बाराबंकी • 20 May 2026
verified

"सारंग दादा! आपने 'झरिहख' शब्द के साथ पूरे बचपन को आँगन में ला खड़ा किया। वह टीनशेड पर बूँदों का शोर, अम्मा का चूल्हे की बची आग बाहर निकाल कर कपड़े सेंकना... आज सीमेंट के कमरों में वह सोंधी खुशबू और वह अपनापा कहीं खो गया है। अवधी गद्य में ऐसा प्रामाणिक चित्रण विरले ही मिलता है।"

डॉ

डॉ. सुधीर शुक्ला

लखनऊ विश्वविद्यालय • 21 May 2026
format_quote

"श्रद्धेय डॉ. भगवान वत्स जी के प्रति व्यक्त आदर और राष्ट्रीय सेवा योजना की वह दृष्टि आज भी आपकी जीवनशैली में झलकती है। रात को 1 बजे तक अखबार का संपादन और सुबह पक्षियों का कलरव—यह संस्मरण मात्र एक आलेख नहीं, ग्रामीण जीवन का सांस्कृतिक दस्तावेज है।"

volunteer_activism

स्वयंसेवक सहभागिता प्रपत्र (Volunteer Enrollment Form)

माटी का ऋण और सामाजिक उत्तरदायित्व • ग्रीन गैंग स्वयंसेवक दल

edit_note कृपया अपनी सही जानकारी भरें ताकि आपके निकटतम क्षेत्र के ग्रीन गैंग समन्वयक आपसे संपर्क कर सकें।