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प्रदीप सारंग संस्मरण ग्रंथावली
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प्रदीप सारंग संस्मरण संकलन • अध्याय २ / ९
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आलेख

नृत्य द्वारा उठाया जाता है - देवी-देवताओं के वाहन से जुड़े रहस्य से पर्दा

भारतीय पौराणिक कथाओं में पशु-पक्षियों के वाहनों को देवी-देवताओं के विशेष गुणों और ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं के प्रतीक रूप में दर्शाया गया है। हमारी पारंपरिक नृत्य और कला शैलियां इन दैवीय गुणों, मुद्राओं और प्रकृति के प्रति सम्मान को अभिव्यक्ति देकर समाज को आध्यात्मिक चेतना से जोड़ती हैं।

account_circle लेखक: प्रदीप सारंग
event 16 Sep 2026
pin_drop कमरावां, बाराबंकी (उ.प्र.)
schedule 12 min read
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नृत्य  द्वारा उठाया  जाता है - देवी-देवताओं के वाहन से जुड़े रहस्य से पर्दा
photo_camera आलेख प्रमुख दृश्य • श्री प्रदीप सारंग संग्रह उच्च-रिज़ॉल्यूशन मूल छायाचित्र

नृत्य द्वारा देव वाहनों की स्तुति तथा देवता के गुणों का वर्णन

आस्था, विश्वास और परंपरा पर आधारित ,देवी-देवताओं और मनुष्य और पौधों और जानवरों  के बीच संबंध बहुत गहन, हैं।


 भारतीय पौराणिक कथाएँ विभिन्न जानवरों और पक्षियों को विभिन्न देवताओं के साथ जोड़ती हैं। कथाओं में सभी देवी-देवताओं को विशेष वाहनों की सवारी करते चित्रित किया गया है। हिन्दू धर्म को गहराई से ना  जानने वाले अक्सर आश्चर्य करते हैं कि इस विशेष पक्षी को उनके वाहन के रूप में क्यों चुना गया। सभी देवी देवताओँ के वाहनों को चित्रकला, नृत्य कला, मे भी सम्मान दिया गया है। कई नृत्य तो सम्पूर्ण रूप मे विशेष पशु यां पक्षी को समर्पित है पंखों को दैवीय दर्जा प्रदान करके सम्मान दिया गया है -भगवन कृष्ण मुकुट मे मोर पंख इसका श्रेष्ठ उदाहरण है आज भी भूत प्रेत तथा बुरी शक्तियॉ के प्रभाव दूर करने के लिए भी मोर पंखो का इस्तेमाल आम बात है।

         भागवत पुराण के एक श्लोक के अनुसार  उभयचर ,जलचर, थलचर, कीट पतंगो ,स्तनधारी पशु, पक्षियों  को अपने बच्चों की तरह समझना चाहिए। यह श्लोक इस बात पर प्रकाश डालता है कि हमारे पूर्वज प्रकृति को कितना सन्मान देते थे परन्तु एक विशेष पशु यां पक्षी को इतने सम्मान क्यों मिला कि हमारे देवी देवता के वाहन बने। कला तथा नृत्य में उनके विशेष गुणों पर प्रकाश डाला गया है।

           भगवान ब्रह्मा का वाहन हंस है। हंस की सटीक भेद करने की क्षमता  रचनात्मक शक्ति, ज्ञान, आंतरिक अहसास का

प्रतिनिधित्व करता है। हंस अपने मजबूत जोड़ी, एक पत्नी और पारिवारिक बंधन के लिए जाने जाते हैं। हंस पवित्रता और परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करते हैं और शांत आचरण के माध्यम से, हंस साधकों को हृदय की शुद्धता अपनाने और आध्यात्मिक विकास के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। ब्रह्मा को संसार के पालक के रूप मे पूजा जाता है किसी भी घर को चलाने के लिए इन गुणों का होना आवश्यक है मोहिनीअट्टम नृत्य में हंस पद नामक पदचलन हंस के चलने की मुद्रा को प्रकट करता है  यह सब गुण ब्रह्मा जी में विभिन्न कथाओ द्वारा दर्शाए गए हैं।


         भगवान विष्णु के वाहन सभी पक्षियों में सर्वश्रेष्ठ, पक्षियों का राजा. गरुड़ हैं। गरुड़ शक्ति, साहस और अटल निष्ठा का प्रतीक होते हैं  तथा बुद्धिमान , बेहतरीन योद्धा होने के साथ तीव्र गति से उड़ सकते हैं।  गरुड़ के स्वामी भगवान विष्णु है  विष्णु  हिंदू धर्म के ऐसे देवता है जो अन्याय से लड़ते हैं और धर्म की रक्षा के लिए धरती पर अवतार ले कर बुराई को नष्ट करते हैं। गरुड़ का उल्लेख  सतयुग ,त्रेता , द्वापर मे भी मिलता है। मंदिर में बजाई जाने वाली हाथ घंटी को गरुड़ घंटी कहा जाता है गरुड़ की पूजा इंडोनेशिया ,बाली तथा थाईलैंड में भी की जाती है। भारतीय नृत्यों में गरुड़ मुद्रा का प्रयोग किया जाता है। केरल का गरुड़न थूकम, एक मंदिर नृत्य है जहां नर्तक गरुड़ की पोशाक पहनते हैं और देवी काली की स्तुति में नृत्य करते हैं।


               केरल के 300  वर्ष पुराने  नृत्य  ओट्टम थल्लाल में "रामानु चरितम्"  पर आधारित गरुड़ गर्वभंगम, नामक  नृत्य नाटिका  विष्णु के अवतारों में से एक  भगवान कृष्ण की कहानी पर आधरित है जिसमे  कृष्ण अभिमानी गरुड़ को विनम्रता का महत्व सिखाते हैं। इंडोनेशिया ,कंबोडिया में गरुड़ को समर्पित नृत्य दर्शनीय है। वैदिक काल की एक कविता सुपरनाख्याना गरुड़ की महिमा का गुणगान करती है। गरुड़ के गुण भगवान विष्णु के महिमामंडन का सटीक प्रतिनिधित्व करते हैं।


भगवान शिव के वाहन हैं नंदी-बैल तथा गले मे विराजमान हैं सर्प। ऐसा माना जाता है कि यह पवित्र सांप शिव के गले की रक्षा करता है, और जहर को उनके गले से नीचे उतरने से रोकता है। नंदी बैल जिन्हे नंदिकेश्वर या नंदीदेव के नाम से भी जाना जाता है। संस्कृत भाषा अनुसार नंदी का अर्थ है- जो आनंद मे रहता है, खुश है,  बैल शक्ति ,निर्भयता, साहस का प्रतीक हैं। एक और दिलचस्प तथ्य यह है कि गुस्सा आने पर सब कुछ तहस-नहस करने की ताकत भी रखता है। भगवान शिव सदैव मस्त भक्ति में लीन रहते हैं इसलिए शिव को अच्छाई और बुराई दोनों के स्रोत के रूप में देखा जाता है। शिव जब एक तपस्वी होते हैं तो सभी सांसारिक सुखों से दूर रहते हैं। परन्तु क्रोध आने पर तांडव नृत्य करके दुनियाँ को नष्ट करने की क्षमता भी रखते हैं। बैल भी प्राकृतिक रूप से इन गुणों का ही प्रतिनिधित्व करता है। हमारे पूर्वजों ने इसी गुण के कारण इनको एक पर्व में पूजा करने का प्रावधान करके सम्मानित किया है। बैलों को समर्पित एक त्योहार  बैल पोला पर्व  मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ, दक्षिण भारत में उत्साह के साथ भाद्रपद की अमावस्या को  मनाया है। भगवान शिव के वाहन नंदी बैल का संबंध भी इस दिन से बताया जाता है। 


भगवान ब्रह्मा की पत्नी देवी  देवी सरस्वती के वाहन  है हंस : 

- पूरे इतिहास में विभिन्न संस्कृतियों और पौराणिक कथाओं में हंसों को कला, साहित्य और लोककथाओं में चित्रित किया गया है, जो सुंदरता, पवित्रता और प्रेम का प्रतीक है। हंस अक्सर रोमांटिक विचारों से जुड़े होते हैं, जो उन्हें पेंटिंग, मूर्तियों और कविता में लोकप्रिय विषय बना देते है। ब्रह्मा जी   सृष्टि के सृजनकर्ता है सृष्टि को चलाने का आधार सुंदरता, पवित्रता और प्रेम  रोमांटिक विचार ही है माँ सरस्वती की पूजा के बिना किसी  भी कला के कार्यक्रम की शुरुआत नहीं होती -सरस्वती को समर्पित नृत्य मे हंस का उल्लेख न हो यह असंभव है


भगवान विष्णु की पत्नी देवी लक्ष्मी के वाहन है उल्लू :

 लक्ष्मी जी को  धन, सौभाग्य, खुशी, यौवन और सुंदरता की देवी माना जाता है वो कमल के फूल पर विराज मान होती है  वैदिक साहित्य अनुसार कमल का फूल ज्ञान, आत्म-साक्षात्कार और मुक्ति का प्रतीक है, और वास्तविकता का प्रतिनिधित्व करता है, उनकी चार भुजा धर्म,अर्थ ,काम,मोक्ष ,का प्रतिनिधत्व करती है तथा आम जन को रास्ता  दिखाती है कि   ,गहन दुःख तथा जीवन के अंधकार मय क्षणों मे भी बुद्धि  दूरदृष्टि के साथ सोचना तथा अपने लक्ष्य धर्म,अर्थ ,काम,मोक्ष  को प्राप्त करना प्रत्येक मनुष्य के लिए आवश्य्क है

उल्लू का अवगुण है उल्लू दिन के उजाले में अंधे हो जाने वाले पक्षी के रूप में  जाने जाते है   उल्लू ज्ञान और धन प्राप्त करने के बाद अंधेपन और लालच से दूर रहने के लिए एक प्रतीकात्मक अनुस्मारक के रूप में भी कार्य करता है  उल्लू रात के गहन अँधेरे मे देखने की क्षमता रखते है जो मनुष्यों को  ज्ञान का निरीक्षण करने, देखने और खोजने का प्रयास करने का संकेत देता है। फ्रांस मे उल्लू की 3 0000 वर्ष पुराणी पेटिंग मे उल्लू का चित्र मिला है |

शिव पुत्र  भगवान गणेश  के वाहन है चूहा 

गणेश जी बुद्धि के देवता है तो चूहा को तर्क-वितर्क का प्रतीक माना गया है। चूहों की एक बड़ी विशेषता यह है कि इनकी याददाश्त बहुत तेज होती है। गणेश के साथ चूहे की उपस्थिति बुद्धि की शक्ति और रणनीतिक सोच और जीवन की चुनौतियों को पार करने की क्षमता की याद दिलाती है, जो हिंदू पौराणिक कथाओं में ज्ञान और अंतर्दृष्टि के दिव्य गुणों का प्रतीक है। मुसहरी नृत्य बिहार का एक प्रसीद नृत्य है जो चूहों को पकड़ने वाली एक जाती द्वारा किया जाता है |


शिव पुत्र  भगवान कार्तिकेय के वाहन है मोर :

मोर के बारे मानते है कि उसे नक़ल करने का गुण प्राप्त है जो ज्ञान प्राप्त करने के लिए अति आवश्यक है -शिव पुत्र कार्तिके जी के वाहन मोर ही है मयूर नृत्य उत्तर प्रदेश के बृज क्षेत्र का एक लोक नृत्य है। यह मोर के पंखों से सुसज्जित मोर जैसी पोशाक पहने लड़कियों द्वारा किया जाता है... मयिलाट्टम तमिलनाडु और केरल   का मोर नृत्य  है, यह भारतीय लड़कियों द्वारा  थाई पोंगल के फसल उत्सव के दौरान मोर का रूप धर कर  किया जाता है।


देवी दुर्गा के वाहन है शेर –

-ब्रह्मांड की अदम्य शक्तिशाली माता और योद्धा देवी दुर्गा उनका वाहन शेर नहीं तो और क्या हो सकता है निडर जंगल के राजा के रूप में जाना जाने वाला शेर हिंदू धर्म में सर्वोच्च प्राणी के रूप में पूजनीय है। दुर्गा ने अपनी शक्ति और नियंत्रण का प्रदर्शन करते हुए इस शक्तिशाली शेर को आसानी से वश में कर लिया। यह हमें बताता है की साहस से आप किसी पर भी  निंयत्रण  है बाली का प्रसीद नृत्य  बारोंग डांस विशाल  शेर को समर्पित है  बाघा नाचा या टाइगर नृत्य संबलपुरी लोक नृत्य बिहार में किया जाता है |


हमारे ऋषि मुनियों ने प्रकृति का करीब से अध्ययन किया पशु पक्षियों के व्यवहार को समझा -परन्तु आम जनता जो उस वक्त ज्यादतर अशिक्षित थी उन तक अपनी खोजो को पहुँचाने के लिए प्रतीकों का सहारा  लिया तथा  जातक कथाओ , धार्मिक व्याख्यानों , नृत्य ,चित्रकला आदि के माध्यम से आम जनो तक पहुँचाया -तीतर पक्षी से  तितरिया नामक उपनिषद  इस बात की पुष्टि करता है  ये वाहन विभिन्न ऊर्जाओं  का प्रतिनिधित्व करते हैं जो ब्रह्मांड के साथ-साथ मनुष्यों में भी मौजूद हैं प्रत्येक देवता या देवी एक विशेष ऊर्जा के प्रभारी हैं, जिस पर वे अपनी इच्छानुसार नियंत्रण करते हैं। वाहन के सकारात्मक गुण  अक्सर भगवान के प्रतिनिधि होते हैं और नकारात्मक गुण वे गुण होते हैं जिन्हें देवता या देवी ने वश में किया है। 

भारतीय  संस्कृति मे बहुत से लोक नृत्य केवल देवी देवता के वाहनों को समर्पित है तथा उनके गुणों का चित्रण करते है ओड़िसा के कालाहांडी का सींग बाजा नृत्य  प्रकृति के मनुष्यों के सम्बन्धो पर आधारित इसका श्रेष्ठ उदहारण है यह एक वशिष्ट नृत्य  है जिसमे  शिकारी की मुद्रा , सर्प की चाल ,बिल्ली की लड़ाई , मोर की नृत्य , तितलियों की उड़ने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया जाता है  ओड़िसा राजस्थान , केरल ,असम , त्रिपुरा आदि  के आदिवासियों के नृत्य  , अनगिनत भारतीय  लोक नृत्यों  मे , प्रकृति के सम्बन्धो का समावेश है तथा यह नृत्य इन  संबंधो को  प्रस्तुतु के माध्यम  से जनजन तक पहुंचाने  का महत्पूर्ण काम करते है


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— प्रदीप सारंग

कमरवाँ, सतरिख (बाराबंकी) • संस्मरण संकलन
प्रदीप सारंग संस्मरण डिजिटल ग्रंथावली (संस्करण 2026)
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ग्रंथ अनुक्रमणिका

कुल ९ आलेख व अध्याय
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प्रदीप सारंग संस्मरण डिजिटल ग्रंथावली (संस्करण 2026)
translate अवधी लोक-शब्दावली मंजूषा (Awadhi Lexicon)

इस संस्मरण में प्रयुक्त ठेठ अवधी शब्दों के अर्थ

बाराबंकी जनपद की बोलचाल से संकलित
झरिहख संज्ञा • Awadhi

अनवरत कई दिनों तक चलने वाली लगातार धीमी फुहार व मूसलाधार बारिश।

घरैतिन संज्ञा • Awadhi

गृहस्वामिनी, घर की मालकिन अथवा धर्मपत्नी के लिए आदरसूचक शब्द।

कनकी संज्ञा • Awadhi

चावल का खंडित टुकड़ा (खंढा), जो पक्षियों को चुगाने के काम आता है।

हरहा गोरु संज्ञा • Awadhi

हल जोतने वाले बैल एवं मवेशी जानवर, जो खूंटे पर बंधे रहते हैं।

सुरा बघ्घी संज्ञा • Awadhi

अवध क्षेत्र का प्रसिद्ध पारंपरिक चौपाल खेल (बकरी और बाघ का खेल)।

ओसारा संज्ञा • Awadhi

मकान के सामने बना बरामदा या छज्जे के नीचे की बैठक जहाँ चौपाल लगती है।

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श्री प्रदीप सारंग

edit_note वरिष्ठ साहित्यकार एवं पर्यावरण कार्यकर्ता location_on ग्राम कमरावां, जिला बाराबंकी, उत्तर प्रदेश, भारत
40+ वर्ष साहित्य सेवा ग्रीन गैंग संस्थापक
लेखक सोशल मीडिया जुड़ें
psychology_alt साहित्यिक व जमीनी सरोकार

विगत चार दशकों से अवधी साहित्य की समृद्ध वाचिक परंपरा के संवर्धन और ग्रामीण पर्यावरण के पुनर्जीवन में संलग्न। हिंदी दैनिक समाचार पत्र सन्दौली टाइम्स के सह-संपादक के रूप में निरंतर पत्रकारिता के सरोकारों को जीने वाले सारंग जी ने बाराबंकी की मिट्टी, तालाबों और वृक्षों के संरक्षण हेतु युवाओं की 'ग्रीन गैंग' का नेतृत्व किया है।

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“हारना सीखा नहीं है, जीत का मैं गीत हूँ। जुगनुओं का संग है, इंसानियत का मीत हूँ।”
— श्री प्रदीप सारंग
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लेखक विचार अस्वीकरण (Editorial & Author Disclaimer)

इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार, अनुभव और विश्लेषण पूर्णतः लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। वेबसाइट एवं संपादकीय मंडल आलेख में व्यक्त निजी दृष्टिकोण की स्वतंत्रता का सम्मान करता है। विस्तृत कानूनी शर्तों व नीतियों के लिए कृपया हमारी अस्वीकरण नीति (Disclaimer) एवं संपादकीय नीति (Editorial Policy) देखें।

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२ विचार
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विनोद कुमार मिश्र

हैदरगढ़, बाराबंकी • 20 May 2026
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"सारंग दादा! आपने 'झरिहख' शब्द के साथ पूरे बचपन को आँगन में ला खड़ा किया। वह टीनशेड पर बूँदों का शोर, अम्मा का चूल्हे की बची आग बाहर निकाल कर कपड़े सेंकना... आज सीमेंट के कमरों में वह सोंधी खुशबू और वह अपनापा कहीं खो गया है। अवधी गद्य में ऐसा प्रामाणिक चित्रण विरले ही मिलता है।"

डॉ

डॉ. सुधीर शुक्ला

लखनऊ विश्वविद्यालय • 21 May 2026
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"श्रद्धेय डॉ. भगवान वत्स जी के प्रति व्यक्त आदर और राष्ट्रीय सेवा योजना की वह दृष्टि आज भी आपकी जीवनशैली में झलकती है। रात को 1 बजे तक अखबार का संपादन और सुबह पक्षियों का कलरव—यह संस्मरण मात्र एक आलेख नहीं, ग्रामीण जीवन का सांस्कृतिक दस्तावेज है।"

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