जनसेवा ही साधना: एक सतत संकल्प
वर्ष 1969 की 20 अक्टूबर को बाराबंकी के ग्राम कमरावां में जन्मे श्री प्रदीप सारंग एक समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता, साहित्यकार एवं जनसेवक हैं, जो कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपने निरंतर सक्रिय योगदान से युवाओं में सकारात्मक एवं प्रेरणादायक वातावरण सृजित करते रहते हैं।
उनका जीवन समाज सेवा, शिक्षा, पर्यावरण-संरक्षण और जन-जागरूकता के कार्यों के लिए समर्पित है। ग्रामीण विकास, मतदाता जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, गौरैया व परिंदा संरक्षण, जल-सकोरा अभियान तथा अवधी-भाषा-संस्कृति के संरक्षण संवर्धन जैसे कार्यों में उनकी विशेष रुचि है।
"हारना सीखा नहीं है, जीत का मैं गीत हूँ।
जुगनुओं का संग है, इंसानियत का मीत हूँ।"