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eco ग्रीन मॉर्निंग!
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प्रदीप सारंग संस्मरण ग्रंथावली
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प्रदीप सारंग संस्मरण संकलन • अध्याय ५ / ७
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पर्यावरण संरक्षण

ग्रीन गैंग अभियान: 'गुड मॉर्निंग' की जगह 'ग्रीन मॉर्निंग'

बाराबंकी के गाँवों से उठी वह हरित क्रांति, जिसने युवाओं को पेड़ लगाने और अभिवादन में 'ग्रीन मॉर्निंग' बोलने का नया संस्कार सिखाया।

account_circle लेखक: प्रदीप सारंग
event 22 Apr 2026
pin_drop कमरावां, बाराबंकी (उ.प्र.)
schedule 11 min read
spa
ग्रीन गैंग अभियान: 'गुड मॉर्निंग' की जगह 'ग्रीन मॉर्निंग'
photo_camera आलेख प्रमुख दृश्य • प्रदीप सारंग संग्रह उच्च-रिज़ॉल्यूशन मूल छायाचित्र

पर्यावरण संरक्षण जब तक केवल सम्मेलनों और भाषणों तक सीमित रहेगा, तब तक धरती हरी-भरी नहीं हो सकती। 2019 में बाराबंकी के सतरिख और कमरावां अंचल में जब युवाओं की टोली 'ग्रीन गैंग' के रूप में संगठित हुई, तो संकल्प लिया गया कि प्रकृति की रक्षा हमारी दिनचर्या का हिस्सा बनेगी। हमने कहा कि सुबह उठकर केवल गुड मॉर्निंग कहने से दिन अच्छा नहीं होगा, जब तक हाथ में एक पौधा लेकर 'ग्रीन मॉर्निंग' न कहें!

ग्रीन गैंग के सदस्यों ने न केवल पौधरोपण किया, बल्कि प्रत्येक पौधे को वृक्ष बनने तक गोद लिया। गाँव की बंजर जमीनों, पगडंडियों और स्कूलों में नीम, पीपल, बरगद, जामुन और महुआ जैसे पारंपरिक छायादार व फलदार पेड़ लगाए गए। आज बाराबंकी की सड़कों के किनारे लहलहाती अमराई इस जन-आंदोलन की साक्षी है। धरती को हरा-भरा रखना किसी सरकार का नहीं, हर उस मनुष्य का प्राथमिक धर्म है जो इस मिट्टी का अन्न खाता है और इस हवा में साँस लेता है।

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— प्रदीप सारंग

कमरवाँ, सतरिख (बाराबंकी) • संस्मरण संकलन
प्रदीप सारंग संस्मरण डिजिटल ग्रंथावली (संस्करण 2026)
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ग्रंथ अनुक्रमणिका

कुल ७ आलेख व अध्याय
१
पत्रकारिता एवं मीडिया

कैसे बनें पत्रकार, जानें कुछ जरूरी बातें

12 min read
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२
अवधी संस्मरण

झरिहख

14 min read
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३
अवधी लोक-गद्य कथा

सुघरी

10 min read
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४
अवधी काव्य-चिन्तन

सारंग-कुण्डलियाँ व संकल्प-गीत

8 min read
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५
पर्यावरण संरक्षण

ग्रीन गैंग अभियान: 'गुड मॉर्निंग' की जगह 'ग्रीन मॉर्निंग'

11 min read
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६
जीव-दया एवं प्रकृति

परिंदा-संरक्षण: मिट्टी के सकोरे और बेजुबान पक्षियों की प्यास

9 min read
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७
साहित्यिक आलेख

अवधी साहित्य और ग्रामीण पत्रकारिता के चार दशक: एक सिंहावलोकन

15 min read
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प्रदीप सारंग संस्मरण डिजिटल ग्रंथावली (संस्करण 2026)
translate अवधी लोक-शब्दावली मंजूषा (Awadhi Lexicon)

इस संस्मरण में प्रयुक्त ठेठ अवधी शब्दों के अर्थ

बाराबंकी जनपद की बोलचाल से संकलित
झरिहख संज्ञा • Awadhi

अनवरत कई दिनों तक चलने वाली लगातार धीमी फुहार व मूसलाधार बारिश।

घरैतिन संज्ञा • Awadhi

गृहस्वामिनी, घर की मालकिन अथवा धर्मपत्नी के लिए आदरसूचक शब्द।

कनकी संज्ञा • Awadhi

चावल का खंडित टुकड़ा (खंढा), जो पक्षियों को चुगाने के काम आता है।

हरहा गोरु संज्ञा • Awadhi

हल जोतने वाले बैल एवं मवेशी जानवर, जो खूंटे पर बंधे रहते हैं।

सुरा बघ्घी संज्ञा • Awadhi

अवध क्षेत्र का प्रसिद्ध पारंपरिक चौपाल खेल (बकरी और बाघ का खेल)।

ओसारा संज्ञा • Awadhi

मकान के सामने बना बरामदा या छज्जे के नीचे की बैठक जहाँ चौपाल लगती है।

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प्रदीप सारंग

edit_note वरिष्ठ साहित्यकार एवं पर्यावरण कार्यकर्ता location_on ग्राम कमरावां, जिला बाराबंकी, उत्तर प्रदेश, भारत
40+ वर्ष साहित्य सेवा ग्रीन गैंग संस्थापक
लेखक सोशल मीडिया जुड़ें
psychology_alt साहित्यिक व जमीनी सरोकार

विगत चार दशकों से अवधी साहित्य की समृद्ध वाचिक परंपरा के संवर्धन और ग्रामीण पर्यावरण के पुनर्जीवन में संलग्न। हिंदी दैनिक समाचार पत्र सन्दौली टाइम्स के सह-संपादक के रूप में निरंतर पत्रकारिता के सरोकारों को जीने वाले सारंग जी ने बाराबंकी की मिट्टी, तालाबों और वृक्षों के संरक्षण हेतु युवाओं की 'ग्रीन गैंग' का नेतृत्व किया है।

“हारना सीखा नहीं है, जीत का मैं गीत हूँ। जुगनुओं का संग है, इंसानियत का मीत हूँ।”
— प्रदीप सारंग
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इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार, अनुभव और विश्लेषण पूर्णतः लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। वेबसाइट एवं संपादकीय मंडल आलेख में व्यक्त निजी दृष्टिकोण की स्वतंत्रता का सम्मान करता है। विस्तृत कानूनी शर्तों व नीतियों के लिए कृपया हमारी अस्वीकरण नीति (Disclaimer) एवं संपादकीय नीति (Editorial Policy) देखें।

साहित्य संचयन

स्वीकृत अवधी कृतियाँ व अन्य आलेख

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कैसे बनें पत्रकार, जानें कुछ जरूरी बातें पत्रकारिता एवं मीडिया
20 May 2026 • 12 min read

कैसे बनें पत्रकार, जानें कुछ जरूरी बातें

भारत में शिक्षा, रोजगार, कृषि, स्वास्थ्य, राजनीति और सामाजिक मुद्दे पत्रकारिता के प्रमुख विषय हैं। पत्रकार समाज तक सटीक और निष्पक्ष जानकारी पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अंशकालिक और पूर्णकालिक पत्रकारों की जिम्मेदारियाँ समान होती हैं, लेकिन सुविधाओं में भिन्नता होती है।

झरिहख अवधी संस्मरण
19 May 2026 • 14 min read

झरिहख

वर्षा, बचपन और गाँव की चौपाल के सजीव संस्मरण — जब छत पर टपकती बूँदें और टीनसेट पर झमझम आवाज नींद उड़ा देती थी।

सुघरी अवधी लोक-गद्य कथा
14 May 2026 • 10 min read

सुघरी

मेला जाय की खुशी मा, गोबर की खेप लइकै जाय रही 'सुघरी' के कदमन की चाल आजु अपने आपै कुछ बढ़ी हुई है।

पाठक प्रतिक्रिया व संस्मरण (Comments)

ग्रीन गैंग अभियान: 'गुड मॉर्निंग' की जगह 'ग्रीन मॉर्निंग' एवं अवधी साहित्य पर अपने विचार साझा करें

२ विचार
वि

विनोद कुमार मिश्र

हैदरगढ़, बाराबंकी • 20 May 2026
verified

"सारंग दादा! आपने 'झरिहख' शब्द के साथ पूरे बचपन को आँगन में ला खड़ा किया। वह टीनशेड पर बूँदों का शोर, अम्मा का चूल्हे की बची आग बाहर निकाल कर कपड़े सेंकना... आज सीमेंट के कमरों में वह सोंधी खुशबू और वह अपनापा कहीं खो गया है। अवधी गद्य में ऐसा प्रामाणिक चित्रण विरले ही मिलता है।"

डॉ

डॉ. सुधीर शुक्ला

लखनऊ विश्वविद्यालय • 21 May 2026

"श्रद्धेय डॉ. भगवान वत्स जी के प्रति व्यक्त आदर और राष्ट्रीय सेवा योजना की वह दृष्टि आज भी आपकी जीवनशैली में झलकती है। रात को 1 बजे तक अखबार का संपादन और सुबह पक्षियों का कलरव—यह संस्मरण मात्र एक आलेख नहीं, ग्रामीण जीवन का सांस्कृतिक दस्तावेज है।"

eco आँखें फाउंडेशन द्वारा वित्त पोषित तथा प्रदीप सारंग द्वारा संस्थापित "ग्रीन गैंग"

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एक बार 500 रुपये जमा करने वाले व्यक्ति को ग्रीन स्वयं सेवक "ग्रीन वॉलंटियर" तथा "हरित स्वयंसेवक" कहा जायेगा।

2 स्वयंसेवक ₹50 • १ वर्ष

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