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प्रदीप सारंग संस्मरण ग्रंथावली
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प्रदीप सारंग संस्मरण संकलन • अध्याय १ / ७
menu_book अध्याय १
पत्रकारिता एवं मीडिया

कैसे बनें पत्रकार, जानें कुछ जरूरी बातें

भारत में शिक्षा, रोजगार, कृषि, स्वास्थ्य, राजनीति और सामाजिक मुद्दे पत्रकारिता के प्रमुख विषय हैं। पत्रकार समाज तक सटीक और निष्पक्ष जानकारी पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अंशकालिक और पूर्णकालिक पत्रकारों की जिम्मेदारियाँ समान होती हैं, लेकिन सुविधाओं में भिन्नता होती है।

account_circle लेखक: प्रदीप सारंग
event 20 May 2026
pin_drop कमरावां, बाराबंकी (उ.प्र.)
schedule 12 min read
spa
कैसे बनें पत्रकार, जानें कुछ जरूरी बातें
photo_camera आलेख प्रमुख दृश्य • प्रदीप सारंग संग्रह उच्च-रिज़ॉल्यूशन मूल छायाचित्र

भारत में शिक्षा, रोजगार, कृषि, स्वास्थ्य, राजनीति और सामाजिक मुद्दे पत्रकारिता के प्रमुख विषय हैं। पत्रकार समाज तक सटीक और निष्पक्ष जानकारी पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अंशकालिक और पूर्णकालिक पत्रकारों की जिम्मेदारियाँ समान होती हैं, लेकिन सुविधाओं में भिन्नता होती है। यदि आप पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रवेश करना चाहते हैं, तो यह केवल एक पेशा नहीं बल्कि समाज के प्रति गहरी जवाबदेही और नैतिक संकल्प है।

पत्रकार बनने के लिए किसी भी विषय में स्नातक (Graduation) होना प्राथमिक आवश्यकता है। इसके उपरांत पत्रकारिता एवं जनसंचार (Journalism and Mass Communication - BJMC, MJMC या PG Diploma) का पाठ्यक्रम आपकी वैचारिक नींव को मजबूत करता है। भाषा पर मजबूत पकड़, व्याकरणिक शुद्धता और संक्षिप्त किंतु प्रभावशाली लेखन शैली एक पत्रकार के प्राथमिक अस्त्र हैं।

समाचार केवल प्रेस विज्ञप्तियों या वातानुकूलित कमरों से नहीं निकलते। सच्चा पत्रकार गाँव की चौपालों, पगडंडियों, किसानों की पीड़ा, श्रमिकों के पसीने और आम जनमानस की समस्याओं के बीच जाकर रिपोर्टिंग करता है। प्रदीप सारंग जी ने चार दशकों तक बाराबंकी और अवध के ग्रामीण अंचलों में यही पत्रकारिता जी है।

पत्रकारिता में किसी भी दल, विचारधारा या प्रलोभन से मुक्त रहकर तथ्यात्मक सत्य पर अडिग रहना सबसे बड़ी परीक्षा है। हर खबर की पुष्टि दोहरे स्रोतों से करना, पीड़ित पक्ष की बात को प्रमुखता देना और जन-सरोकार को शीर्ष पर रखना अनिवार्य नियम है।

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— प्रदीप सारंग

कमरवाँ, सतरिख (बाराबंकी) • संस्मरण संकलन
प्रदीप सारंग संस्मरण डिजिटल ग्रंथावली (संस्करण 2026)
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ग्रंथ अनुक्रमणिका

कुल ७ आलेख व अध्याय
१
पत्रकारिता एवं मीडिया

कैसे बनें पत्रकार, जानें कुछ जरूरी बातें

12 min read
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२
अवधी संस्मरण

झरिहख

14 min read
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३
अवधी लोक-गद्य कथा

सुघरी

10 min read
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४
अवधी काव्य-चिन्तन

सारंग-कुण्डलियाँ व संकल्प-गीत

8 min read
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५
पर्यावरण संरक्षण

ग्रीन गैंग अभियान: 'गुड मॉर्निंग' की जगह 'ग्रीन मॉर्निंग'

11 min read
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६
जीव-दया एवं प्रकृति

परिंदा-संरक्षण: मिट्टी के सकोरे और बेजुबान पक्षियों की प्यास

9 min read
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७
साहित्यिक आलेख

अवधी साहित्य और ग्रामीण पत्रकारिता के चार दशक: एक सिंहावलोकन

15 min read
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प्रदीप सारंग संस्मरण डिजिटल ग्रंथावली (संस्करण 2026)
translate अवधी लोक-शब्दावली मंजूषा (Awadhi Lexicon)

इस संस्मरण में प्रयुक्त ठेठ अवधी शब्दों के अर्थ

बाराबंकी जनपद की बोलचाल से संकलित
चौपाल संज्ञा • Awadhi

गांव का सार्वजनिक सामुदायिक बैठक स्थल जहां लोक चर्चाएं होती हैं।

झरिहख संज्ञा • Awadhi

अनवरत कई दिनों तक चलने वाली लगातार धीमी फुहार व मूसलाधार बारिश।

घरैतिन संज्ञा • Awadhi

गृहस्वामिनी, घर की मालकिन अथवा धर्मपत्नी के लिए आदरसूचक शब्द।

कनकी संज्ञा • Awadhi

चावल का खंडित टुकड़ा (खंढा), जो पक्षियों को चुगाने के काम आता है।

हरहा गोरु संज्ञा • Awadhi

हल जोतने वाले बैल एवं मवेशी जानवर, जो खूंटे पर बंधे रहते हैं।

सुरा बघ्घी संज्ञा • Awadhi

अवध क्षेत्र का प्रसिद्ध पारंपरिक चौपाल खेल (बकरी और बाघ का खेल)।

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प्रदीप सारंग

edit_note वरिष्ठ साहित्यकार एवं पर्यावरण कार्यकर्ता location_on ग्राम कमरावां, जिला बाराबंकी, उत्तर प्रदेश, भारत
40+ वर्ष साहित्य सेवा ग्रीन गैंग संस्थापक
लेखक सोशल मीडिया जुड़ें
psychology_alt साहित्यिक व जमीनी सरोकार

विगत चार दशकों से अवधी साहित्य की समृद्ध वाचिक परंपरा के संवर्धन और ग्रामीण पर्यावरण के पुनर्जीवन में संलग्न। हिंदी दैनिक समाचार पत्र सन्दौली टाइम्स के सह-संपादक के रूप में निरंतर पत्रकारिता के सरोकारों को जीने वाले सारंग जी ने बाराबंकी की मिट्टी, तालाबों और वृक्षों के संरक्षण हेतु युवाओं की 'ग्रीन गैंग' का नेतृत्व किया है।

“हारना सीखा नहीं है, जीत का मैं गीत हूँ। जुगनुओं का संग है, इंसानियत का मीत हूँ।”
— प्रदीप सारंग
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लेखक विचार अस्वीकरण (Editorial & Author Disclaimer)

इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार, अनुभव और विश्लेषण पूर्णतः लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। वेबसाइट एवं संपादकीय मंडल आलेख में व्यक्त निजी दृष्टिकोण की स्वतंत्रता का सम्मान करता है। विस्तृत कानूनी शर्तों व नीतियों के लिए कृपया हमारी अस्वीकरण नीति (Disclaimer) एवं संपादकीय नीति (Editorial Policy) देखें।

साहित्य संचयन

स्वीकृत अवधी कृतियाँ व अन्य आलेख

सभी स्वीकृत आलेख देखें arrow_forward
झरिहख अवधी संस्मरण
19 May 2026 • 14 min read

झरिहख

वर्षा, बचपन और गाँव की चौपाल के सजीव संस्मरण — जब छत पर टपकती बूँदें और टीनसेट पर झमझम आवाज नींद उड़ा देती थी।

सुघरी अवधी लोक-गद्य कथा
14 May 2026 • 10 min read

सुघरी

मेला जाय की खुशी मा, गोबर की खेप लइकै जाय रही 'सुघरी' के कदमन की चाल आजु अपने आपै कुछ बढ़ी हुई है।

सारंग-कुण्डलियाँ व संकल्प-गीत अवधी काव्य-चिन्तन
02 May 2026 • 8 min read

सारंग-कुण्डलियाँ व संकल्प-गीत

"पेड़, पखेरू, नदियाँ और मनुष्य की अस्मिता" — अवधी के प्राण-छंद कुण्डलियाँ में रचित लोक-चेतना और पर्यावरण के अमर स्वर।

पाठक प्रतिक्रिया व संस्मरण (Comments)

कैसे बनें पत्रकार, जानें कुछ जरूरी बातें एवं अवधी साहित्य पर अपने विचार साझा करें

२ विचार
वि

विनोद कुमार मिश्र

हैदरगढ़, बाराबंकी • 20 May 2026
verified

"सारंग दादा! आपने 'झरिहख' शब्द के साथ पूरे बचपन को आँगन में ला खड़ा किया। वह टीनशेड पर बूँदों का शोर, अम्मा का चूल्हे की बची आग बाहर निकाल कर कपड़े सेंकना... आज सीमेंट के कमरों में वह सोंधी खुशबू और वह अपनापा कहीं खो गया है। अवधी गद्य में ऐसा प्रामाणिक चित्रण विरले ही मिलता है।"

डॉ

डॉ. सुधीर शुक्ला

लखनऊ विश्वविद्यालय • 21 May 2026

"श्रद्धेय डॉ. भगवान वत्स जी के प्रति व्यक्त आदर और राष्ट्रीय सेवा योजना की वह दृष्टि आज भी आपकी जीवनशैली में झलकती है। रात को 1 बजे तक अखबार का संपादन और सुबह पक्षियों का कलरव—यह संस्मरण मात्र एक आलेख नहीं, ग्रामीण जीवन का सांस्कृतिक दस्तावेज है।"

eco आँखें फाउंडेशन द्वारा वित्त पोषित तथा प्रदीप सारंग द्वारा संस्थापित "ग्रीन गैंग"

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2 स्वयंसेवक ₹50 • १ वर्ष

50 रुपये जमा करके कोई व्यक्ति एक वर्ष के लिए "वालंटियर" तथा "स्वयंसेवक" कहा जायेगा।

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ग्रीन स्वयंसेवक ("ग्रीन वॉलंटियर" / "हरित स्वयंसेवक") हेतु ₹500/- का भुगतान कर स्क्रीनशॉट अपलोड करें।

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