हरियाली-अभियान ('ग्रीन गैंग' एवं 'ग्रीन मॉर्निंग')
धरती पर हरियाली बढ़ाने तथा जन-जन की जीवनशैली में प्रकृति प्रेम को शामिल कराने के उद्देश्य से स्थापित 50,000+ वृक्षारोपण की सजीव मुहिम।
"जब भीषण गर्मी में नदियां और तालाब सूख जाते हैं, तब हमारे आंगन और छतों पर रखे मिट्टी के सकोरे ही परिंदों के लिए जीवन बन जाते हैं। यह केवल जलदान नहीं, मानवता का संवेदनशील कर्तव्य है।"
ग्रीष्म ऋतु में प्यास से व्याकुल परिंदों को निरंतर अमृत-जल उपलब्ध कराना
कुम्हारों से सीधे खरीद कर आमजन व विद्यालयों में वितरित
देवा, सतरिख, हैदरगढ़, रामनगर एवं फतेहपुर ब्लॉक आच्छादित
प्रत्येक वर्ष 45°C तापमान में विशेष सकोरा अभियान संचालन
जो रोज़ सवेरे अपनी छतों व आँगनों में दाना-पानी भरते हैं
हरियाली-अभियान ('ग्रीन गैंग' एवं 'ग्रीन मॉर्निंग') — विस्तृत विवरण व लक्ष्य
5 जून 2019 से निरंतर गतिशील हरियाली अभियान के अंतर्गत जनपद बाराबंकी एवं उत्तर प्रदेश के विभिन्न अंचलों में 50,000 से अधिक बरगद, पीपल, नीम और पाकड़ के वृक्षों का रोपण किया जा चुका है। 'ग्रीन मॉर्निंग' अभिवादन का संस्कार ग्रामीण जन-जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है।
प्रत्येक प्रातः ग्राम चौपालों और विद्यालयों में 'गुड मॉर्निंग' के स्थान पर 'ग्रीन मॉर्निंग' बोलने की परंपरा ने पर्यावरण संवर्धन को दैनिक जीवन की आदत बना दिया है।
आखिर क्यों आवश्यक है यह जन-अभियान?
प्रकृति का संतुलन बनाए रखने वाले हमारे नन्हे जीव, पर्यावरण और ग्रामीण विरासत कंक्रीट के अंधाधुंध विस्तार से संकट में हैं। अवध की माटी से उठती यह एक सामूहिक पुकार है।
भीषण लू और सूखते जल-स्रोत
मई-जून के प्रचंड ताप में गाँव के पुराने पोखर, ताल-तलैया और कुएँ सूख जाते हैं। पानी की एक बूंद की तलाश में उड़ते हुए दर्जनों परिंदे डिहाइड्रेशन से दम तोड़ देते हैं।
पारंपरिक घोंसलों का उजड़ना
कच्चे खपरैल मकानों, छप्परों और पुराने रोशनदानों की जगह पक्के कंक्रीट के मकानों ने ले ली है। घरेलू गौरैया (Sparrow) और बुलबुल के लिए सुरक्षित घर समाप्त हो रहे हैं।
खाद्य संकट व कीटनाशकों का दुष्प्रभाव
खेतों में रासायनिक खादों के प्रयोग से कीड़ों और प्राकृतिक बीजों में विषाक्तता बढ़ गई है, जिससे पक्षियों की प्रजनन क्षमता व जीवन-काल पर गहरा आघात पहुंचा है।
ग्रीष्मकालीन सकोरा एवं पौधा वितरण महा-अभियान 2026
आगामी ग्रीष्म ऋतु में बाराबंकी ज़िले के प्रत्येक न्याय पंचायत तक 5,000 नए सकोरे एवं 500 सुरक्षित घोंसले पहुंचाने का दृढ़ संकल्प। अपने क्षेत्र में वितरण केंद्र स्थापित करने या स्वयंसेवक बनने हेतु आज ही पंजीकरण करें।
अभियान संकल्प एवं सहयोग पत्र
अपने घर की छत या बालकनी में एक सकोरा पानी और मुट्ठी भर दाना रखने का पवित्र संकल्प लें।
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